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Monday, 27 July 2020

' कसार देवी उत्तराखंड , कसार में वो सब कुछ है जो बैगपैकर्स के लिए इसे एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाती है

' कसार देवी उत्तराखंड , कसार में वो सब कुछ है जो बैगपैकर्स के लिए इसे एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाती है

कई पॉपुलर हिल स्टेशन घूम चूका हूँ। इसलिए इस बार तय किया एक ऐसी जगह जाने का जो पॉपुलर न हो। सर्च करने पर कई ऑप्शन आ रहे थे जो मुझे और कन्फ्यूज कर रहे थे। फिर एक जगह पर नज़र ठहर गई और वो जगह थी कसार देवी। थोडा गूगल किया तो पता चला ये जगह तो ऐतिहासिक है। फिर मैंने ट्रेवल प्लान बनाया और निकल पड़ा।


कसार देवी उत्तराखंड के कुमाऊं रीजन में अल्मोड़ा के करीब एक क़स्बा है। मेरे साथ मेरी बीवी भी थी। हमारी शादी को 3 साल हो चुके थे. बैचलर लाइफ में मैंने खूब ऑफबीट डेस्टिनेशन को कवर किया था। लेकिन बीवी के साथ तीन सालों में अक्सर पॉपुलर डेस्टिनेश पर ही गया था। इसलिए इस बार थोडा डर था कि पता नहीं कैसी जगह है? अच्छे होमस्टे मिलेंगे भी या नहीं? खैर अब जाना था तो जाना था। सोचा जो भी होगा, जैसा भी होगा वहां जा कर देखा जाएगा।

कुछ ऐसे शुरू हुआ सफ़र

दिल्ली से रात 12 बजे हमारा सफ़र शुरू हुआ। आनंद विहार से हमने बस ली सुबह 9 बजे तक काठगोदाम पहुंचे। वैसे आप चाहे तो दिल्ली से ट्रेन भी ले सकते हैं। काठगोदाम के लिए कई ट्रेनें हैं. काठगोदाम पहुँच कर हमने अल्मोड़ा के लिए टैक्सी लिया। यूँ तो काठगोदाम से शेयर टैक्सी भी मिलते हैं लेकिन अगर आप फोटोग्राफी के शौक़ीन हैं तो प्राइवेट टैक्सी कर लें क्योंकि काठगोदाम से अल्मोड़ा के रस्ते में आपको कई ऐसे लोकेशन मिलेंगे कि आप फोटोज क्लिक करने से खुद को रोक नहीं पायेंगे। शेयर टैक्सी आपको 300 रुपये में मिल जायेंगे और प्राइवेट टैक्सी 1200 तक में। साढ़े तीन घंटे में हम अल्मोड़ा पहुँच गए।

सफ़र काफी लंबा था इसलिए हम बिलकुल थक गए थे। बस अब जल्द से जल्द कसार पहुँच कर अपने रूम में आराम करना चाहते थे. चूँकि अल्मोड़ा मैं पहले भी आ चुका था, इसलिए अल्मोड़ा में न रुक कर सीधे लोकल टैक्सी लिया कसार देवी के लिए। अल्मोड़ा -बिनसर हाइवे पर अल्मोड़ा से करीब 8 किलोमीटर दूर है कसार देवी गाँव। पहली बार पहाड़ के लोकल टैक्सी में सफ़र किया और अद्भुत अनुभव था। वो दरअसल टैक्सी नही एक जीप थी, जिसमे कई लोकल पहाड़ी लोग बैठे थे। उनकी कुमाउनी भाषा कुछ समझ तो नहीं आ रही थी लेकिन बड़ा ही अच्छा लग रहा था।

कसार देवी

कसार देवी पहुँच कर लगा ये वाकई में उत्तराखंड के मुकुट में छुपा एक नगीना। कसार में वो सब कुछ है जो बैगपैकर्स के लिए इसे एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाती है- अच्छे लोग, बजट फ्रेंडली, शांत, भीड़ का नामोनिशान नहीं, ना गाड़ियों का शोर, कुछ ट्रेक्स और शानदार लैंडस्केप।

नाम से ऐसा लगता है जैसे ये कोई तीर्थ स्थल हो लेकिन ऐसा है नहीं। कसार एक कस्बा है। उस गाँव में है कसार माता का मंदिर जो दूसरी शताब्दी में बना था और उसी मंदिर के नाम पर इस गाँव का नाम पड़ा कसार देवी। एक बेहद छोटा क़स्बा।

हमने एक हॉस्टल बुक कर रखा था। बरसात का मौसम था। वैसे मैं तो चला गया बरसात में लेकिन आपको सलाह दूंगा की आप बरसात के मौसम में न जाएँ। कसार देवी पहुँचते ही बादलों ने हमारा स्वागत किया। अगस्त में भी मौसम ठंडा हो चला था। हमने जिस हॉस्टल को बुक किया था, उसका नाम था Hot's Hostel. एक छोटा सा हॉस्टल जहाँ से कसार का बेहद खुबसूरत व्यू नज़र आता था।

हमने थोड़ी देर आराम किया। लेकिन मौसम इतना अच्छा था कि ज्यादा देर तक हम कमरे में नहीं रह सके। हम निकल पड़े कसार देवी मंदिर तक ट्रेक करने, जो हमारे हॉस्टल से करीब 2 किलोमीटर दूर था। कसार देवी मंदिर तक ट्रेक करते हुए जाना एक बहुत ही शानदार अनुभव था। कितनी शांति थी यहाँ, यहाँ से लौटने का मन ही नहीं कर रहा था।

कसार देवी मंदिर

कसार देवी माँ दुर्गा के 9 रूपों में से एक माता कात्यायनी को समर्पित है। 1890 में स्वामी विवेकानंद ध्यान के लिए कसार देवी मंदिर में आये थे और कई महीनों तक यहाँ रहे। मंदिर परिसर में लगे एक बोर्ड पर इसकी जानकारी लिखी है। यहाँ कि आध्यात्मिक शांति ने विदेशियों को भी आकर्षित किया। अमेरिकी कवि एलन गिन्सबर्ग, अमेरिकी गायक-गीतकार बॉब डायलन और अंग्रेजी संगीतकार जॉर्ज हैरिसन भी आध्यात्म की खोज में कसार देवी आ चुके हैं। नासा के अनुसार ये पहाड़ वेन एलन नाम की बेल्ट पर स्थित है, जिसकी वजह से यहाँ पर पृथ्वी का चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होता है और असीम ऊर्जा उत्पन्न होती है।


कसार देवी मंदिर

कसार देवी की खाली खाली सड़कें, चीड़ के जंगल, ठंडी ठंडी हवा, पीठ पर बैग टांगे पैदल या फिर साइकिल से कसार नापते विदेशी पर्यटक इस जगह को विशिष्ट बनाते हैं। अगर मौसम साफ़ रहा तो आपको यहाँ से नंदा देवी, पंचाचूली और त्रिशूल पर्वत आराम से दिख जायेंगे। हम नहीं देख सकें क्योंकि हम बरसात के मौसम में गए थे और बादलों ने हमारा पीछा छोड़ा ही नहीं।

कसार में टूरिस्ट रेस्ट हाउस के पास है दीनापानी ग्राउंड। ये मैदान पहाड़ की चोटी पर है और यहाँ पहाड़ी बच्चे आपको फुटबॉल खेलते हुए दिन के किसी भी वक़्त मिल जायेंगे। इस मैदान में बैठकर आप बिनसर की चोटियों को देख सकते हैं। इस मैदान से सूर्योदय और सूर्यास्त का शानदार नजारा देखने को मिलता है।

कसार आने से पहले हमने सोचा था कि छोटा क़स्बा है, एक दिन में घूम कर अगले दिन बिनसर या फिर जागेश्वर के लिए निकल लेंगे। बिनसर यहाँ से महज 16 किलोमीटर है और जागेश्वर करीब 40 किलोमीटर। लेकिन कसार ने हमें ऐसा बाँध लिया और हम 2 दिनों तक वहां रुके। तीसरे दिन हमने जागेश्वर जाने का वक़्त निकाल ही लिया।

जागेश्वर धाम

जागेश्वर जाने के लिए अल्मोड़ा से टैक्सी मिलती है। हमारी किस्मत अच्छी थी कि हमें इस बार भी एक लोकल जीप मिल गई। उस जीप का ड्राइवर नेपाली था। उसने हमें बहुत ही सस्ते में जागेश्वर तक छोड़ दिया। जागेश्वर धाम भागवान शिव का मंदिर हैं। यहाँ एक ही परिसर में छोटे बड़े करीब 124 मंदिर हैं। प्रत्येक मन्दिर के भिन्न भिन्न नाम हैं। सावन में वहां श्रावणी मेला लगता है और बहुत भीड़ होती है। हम गए तो एक दिन पहले ही मेला ख़त्म हुआ था। इसलिए अभी भी वहां कुछ भीड़ थी।


जागेश्वर मंदिर

जागेश्वर से आप एक दिन में ही लौट सकते हैं। कसार के आसपास और भी कई गाँव है जहाँ आप ट्रेकिंग करते हुए जा सकते हैं और कुमाऊं की संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं।

कहाँ ठहरे

कसार देवी में कई छोटे बड़े गेस्ट हाउस हैं। कसार जंगल रिसॉर्ट, इम्पीरियल हाइट्स (लक्जरी कॉटेज), हॉट्स होस्टल (बजट फ्रेंडली), मोक्ष, टूरिस्ट रेस्ट हाउस, डोलमा गेस्टहाउस के अलावा कुछ और रेस्ट हाउस हैं। यहाँ आप होमस्टे भी ले सकते हैं। स्थानीय लोगों के साथ रहना आपके लिए नया अनुभव होगा।

और हाँ यहाँ पहुँच कर कुमाउनी खाना जरूर चखें। हमने जहाँ कुमाउनी खाना खाया था उस छोटे से रेस्टोरेंट का नाम था “द कसार किचेन” और उस खाने का स्वाद अब तक हमारी जुबान पर है।

मेरे लिए इस सफ़र की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि मेरी श्रीमती जी को कसार बहुत पसंद आया। लौटते वक़्त तो मैडम का कहना था कि अब हम ऑफ़बीट डेस्टिनेशन पर ही आया करेंगे। यहाँ भीड़ बिलकुल नहीं होती।



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' देहरादून सहस्त्रधारा , छोटे-बड़े चट्टानों को चीरता हुआ जल प्रवाह आँखों के लिए ऐसा था जैसे एक खुबसूरत तस्वीर रखी हो?

' देहरादून सहस्त्रधारा , छोटे-बड़े चट्टानों को चीरता हुआ जल प्रवाह आँखों के लिए ऐसा था जैसे एक खुबसूरत तस्वीर रखी हो? 
अगर लॉकडाउन से पहले आप अपनी ट्रिप की योजनाओं को इस वजह से टाल रहें थे कि आप पैसे नहीं बचा पा रहें थे या आपको ऑफिस से एक या 2 दिन की ही छुट्टी मिलती थी तो देहरादून की ये बजट ट्रिप का प्लान आपके लिए बेस्ट रहेगा।

क्वारंटाइन के दिनों से पहले,  मैं काफी दिनों से सोच रहा था कि ऑफिस से छुट्टी मिले तो कहीं बाहर घूमने जाऊँ पर करियर एक साल पहले ही शुरू करने की वजह से ना तो पैसे बचा पा रहा था ना ही बॉस छुट्टी देने को राज़ी था। ऐसे में मैंने और मेरे तीन दोस्तो ने योजना बनाई कि हफ्ते की अपनी एक छुट्टी का इस्तेमाल करके देहरादून घूमने चलते हैं। बस फिर क्या था, हमने ट्रेन चेक करना शुरू किया। वैसे तो दिल्ली से देहरादून जाने का बेस्ट विकल्प देहरादून जनशताब्दी एक्सप्रेस है जो आपको 5 घंटें में देहरादून पहुँचा देगी और उसका किराया भी कम है पर ट्रेन में सीट ना मिलने की वजह से हमने बस से जाना सही समझा।

दिल्ली से देहरादून बस का सफ़र
हमे दिल्ली ISBT कश्मीरी गेट से बस पकड़नी थी। हमने निर्धारित जगह पहुँचने के बाद हमने खाना खाया और अपनी बस में जाकर बैठ गए। बस थी शुक्रवार रात 10:30 बजे की और ₹1200 में 4 सीट मिल गयी।  हमें दिल्ली से देहरादून के लिए 6 घंटे लगने थे। सुबह जब 5 बजे बस वाले ने हमें जगाया तो हम आई एस बी टी देहरादून पहुँच गये थे। हमने वहाँ के ऑटो वालों से थोड़ी पूछताछ की, ओयो पर हमने पहले ही कमरे चेक किए थे उनका किराया भी ठीक था पर हमें उससे थोड़े सस्ते में ही एक ऑटो वाले ने रूम दिलवा दिया।

सोच समझ कर करें होटल का चयन

ध्यान रहे कि ओयो से रूम लेने पर आपको सुबह और शाम दो दिन का किराया देना पड़ता है क्योंकि ओयो में दोपहर में ही चेक इन की सुविधा है। हम शनिवार सुबह 5 बजे वहाँ पहुँचे थे और हमें उसी रात ही वहाँ निकलना था। हमने होटल वाले से बात की और एक दिन का ही किराया दिया जो हमारे बजट के अन्दर आ गया। हम होटल सुंदर पैलेस में ठहरे थे जहाँ की सुविधाएँ ठीक थी, आस-पास और भी होटल हैं जो आपको उसी किराए पर मिल जाएँगे।

देहरादून 
लोकल बस यात्रा ने संभाला बजट
होटल में कुछ देर सोने के बाद हम 9 बजे तक तैयार हुए। उस समय तक देहरादून की दुकानें खुलनी शुरू हो जाती हैं। हमने आस पास की दुकानों से सहस्त्रधारा जाने तक का रास्ता पूछा। सहस्त्रधारा वहाँ से 1 घंटे की दूरी पर है और आप वहाँ तक की कैब भी कर सकतें हैं। अगर आपको लोकल में सफ़र करने में परेशानी नहीं है तो मेरा सुझाव होगा की अपने पैसे बचाएँ और बस और ऑटो ले लें। कैब में आपको लोकल से 16 गुना ज्यादा खर्च होगा।

घंटा घर
इंदिरा मार्केट के कैफे
हमने अपने होटल के बहार से लोकल ऑटो लिया जिसने हमें करीब 20 मिनट में परेड ग्राउंड उतारा। इसी जगह से हमें सहस्धारा की बस मिलनी थी। इससे पहले हमने नाश्ता करने का फैसला किया। परेड ग्राउंड चौराहे पर एक रास्ता इंदिरा मार्केट की ओर जाता है जिसके आगे देहरादून का प्रसिद्ध घंटा घर है। हम 10 मिनट पैदल चल कर घंटा घर पहुँच गए जहाँ कई कैफ़े थे। घंटा घर सड़क की शुरुआत में ही एक कैफ़े है के बी सी, जिसका अम्बिएंस काफी सुन्दर था, इसलिए हमने वहाँ नाश्ता करने का फैसला किया। यहाँ आपको हर तरह का नाश्ता सस्ते में मिल जायेगा और खाने की क्वालिटी भी अच्छी है। हमने ₹250 में इडली और आलू पराठे की प्लेट मंगवाई थी जो 4 लोगों के लिए काफी था। वहाँ से आधे घंटे में नाश्ता करके हम परेड ग्राउंड की तरफ वापस चले गए।

हमें तुरंत ही सहस्त्रधारा की बस मिल गयी और ₹40 में हमने करीब 1 घंटे की यात्रा की और अपने पहले पड़ाव पर पहुँच गए। बस की यात्रा आधे घंटे के बाद काफी मज़ेदार हो गयी थी। हर तरफ सिर्फ बादल और बादलों के पीछे छिपे पहाड़ दिखाई दे रहे थे।

पहाड़ों से घिरा सहस्त्रधारा
सहस्त्रधारा पहुँचने पर भी नज़ारा कुछ ऐसा ही था, मनमोहक। वहाँ पहुँचते ही आपको कई लोकल ढाबे दिखेंगे और सामने खूबसूरत पहाड़।

हमने पहाड़ की ओर आगे बढ़ना शुरू किया और कुछ देर आगे जाने के बाद हमें एक दुकानदार ने बताया कि सहस्त्रधारा जाने का रास्ता रोपवे से हो कर जाता है। यह सुनकर हम बहुत उत्साहित हो गए। हमने वहाँ से रोपवे की 4 टिकट ली जिसकी कीमत ₹150 प्रति टिकट थी जिसमें आप सहस्त्रधारा के सभी महवपूर्ण आकर्षण का आनंद ले सकते हैं। हम आगे बढ़े और रास्ते में कई पानी के झरने देखे जो मन को बेहद खुश कर देने वाले थे पर हम वहाँ जाना चाहते थे जहां से ये पानी बह कर आ रहा था। हमें दुकानदारों ने रास्ता दिखाया और हम पहुँच गये उस धारा के पास जहां से पानी का बहाव आ रहा था।
छोटे-बड़े चट्टानों को चीरता हुआ जल प्रवाह आँखों और कानों दोनों के लिए ऐसा था जैसे एक खुबसूरत तस्वीर रखी हो और उसमें हम पानी को बहते हुए देख और सुन सकते हैं। वहाँ कुछ देर आराम से बैठ कर हमने उस दृश्य को निहारा, कुछ तस्वीरें ली और रोपवे के लिए आगे बढ़े। आगे कुछ देर चलने के बाद हम रोपवे के लिए अपने डब्बे पर बैठ गए और रोपवे चलने वाले ने मशीन चालू कर दी। हमलोग ऊपर बढ़ने लगे और नीचे का नज़ारा खुबसूरत होता चला गया। रोपवे के उस डिब्बे से आप पूरा सहस्त्रधारा देख सकते हैं और फिर भी आपका मन नहीं भरेगा।
8-10 मिनट की रोपवे यात्रा के बाद हम ऊपर पहुँच चुके थे जहाँ मनुष्य द्वारा बनाए गये कई आकर्षण थे जैसे स्पेस सेंटर, डी जे, बच्चों के लिए टॉय ट्रेन, हमारे लिए शूटिंग, रॉक क्लाइम्बिंग पर हमारे लिए सबसे बेहतरीन आकर्षण था वहाँ के प्राकृतिक नज़ारे। वो जगह इतनी खूबसूरत थी कि हमने वहाँ 100 से ज्यादा तस्वीरें खींची और जितनी ऊपर तक जा सकते थे चढ़ते चले गये।
सहस्त्रधारा में करीब 2-3 घंटे बिताने के बाद हम रोपवे के ही रास्ते से नीचे आ गये। नीचे उतर कर हमने खाना खाने का सोचा पर वहाँ के ढाबों का खाना बेहद महंगा था इसलिए हमने परेड ग्राउंड की बस पकड़ी और वापस घंटा घर वाले के बी सी कैफ़े में जाकर लंच किया।

रॉब्बर्स केव
पानी से भरी गुफा के अन्दर का रोमांच
इसके बाद हमारा अगला पड़ाव था रॉब्बर्स केव या देहरादून की आम भाषा में कहें तो गुच्चुपानी। यहाँ के लिए भी हमें परेड ग्राउंड से बस मिली। वहाँ से गुच्चुपानी के लिए 2 लोगों का किराया ₹24 थे इसलिए हम काफी सस्ते में आधे घंटे के अन्दर रॉब्बर्स केव पहुँच गये। जहाँ बस आपको उतारती है वहाँ से 1 किलोमीटर तक आपको घुमावदार रोड मिलेगी और आपको वहाँ से अन्दर तक पैदल जाना होगा।
 15-20 मिनट चलने के बाद हम गुच्चुपनी के टिकट काउंटर पर पहुँच गये जहाँ से हमने ₹25 प्रति व्यक्ति के हिसाब से टिकट ली। हमनें आगे जाकर एक काउंटर पर अपनी चप्पल जमा की और वहाँ से हवाई चप्पल ली क्यूंकि हमें गुफा के अन्दर बहते पानी में जाना था।
हम आगे गुफा की ओर बढ़े और पानी में उतर गए। पहले तो मुझे थोड़ा डर लग रहा था क्यूंकि कई जगह पर पानी बहुत गहरा था पर गुफा की चट्टानों की मदद से हम आगे बढ़ते गए, गुफा और गहरी होती जा रही थी और पानी मेरी कमर से ऊपर तक आ चुका था।
गुफा के अन्दर जाना थोड़ा मुश्किल है इसलिए अपने साथ सामान ना लेकर जाएँ, और हो सके तो मोबाइल भी जेब में ही रखें। चट्टानों की मदद से और एक दूसरा का सहारा लेकर हम आगे बढ़े और गुफा की अंत में हमें बहुत ही खूबसूरत झरना दिखाई दिया जहाँ से पानी गुफा के अंदर आ रहा था। गुफा के पानी के बहाव से विपरीत जाकर उस झरने तक पहुँचने जितना मुश्किल था उतना रोमांचक भी। वहाँ की कुछ तस्वीरें लेकर हम वापस वहाँ आ गए जहाँ पानी का बहाव कम था।

वो जगह अनोखी थी और मैंने अपने दोस्त के साथ कई तस्वीरें खींची और पानी में खूब मस्ती की। करीब 2 घंटे समय बिताने के बाद और पूरी तरह गीले होने के बाद हम गुफा से बहार आये और जिस रास्ते से आये थे उसी रास्ते लौट गये।

जहाँ बस ने हमें उतारा था वहाँ से हमें लोकल ऑटो मिल गया और हम अपने होटल वापस आ गये। हमें देहरादून के डियर पार्क भी जाना था पर कपड़े गीले होने की वजह से हम होटल वापस आ गये।

वापस आकर हमने थोड़ा आराम किया, फिर बहार जाकर समोसे और मिठाई खायी। कुछ देर वहीं आस पास घूमने के बाद हमें पास के ढाबे में डिनर किया और फिर सामान लेकर बस के लिए निकल पड़े।

देहरादून की आखिरी ट्रीट

वापसी के लिए हमें सुभाष नगर ग्राफ़िक एरा से बस पकड़नी थी जो आई एस बी टी से सीधे रस्ते पर पड़ता है। हमने ऑटो लिया और 20 मिनट में पहुँच गये। जहाँ से बस मिलनी थी वहाँ एक बहुत शानदार पिज़्ज़ा प्लेस नज़र आ रहा था। बस आने में समय था इसलिए हम उस पिज़्ज़ा प्लेस पर गए और वहाँ फ्रूट संडे आर्डर किया। देहरादून की वो हमारी आखिरी ट्रीट थी और वो भी बहुत स्वादिष्ट थी।

देहरादून हम गए एक दिन के लिए थे पर एक दिन में रोपवे पर जाना, पहाड़ पर ऊपर तक जाना, और पानी से भरी गुफा में जाना, ये सब कुछ बहुत मनोरंजक भी था और बजट में भी था। इस पूरी ट्रिप में 4 लोगों का कर्च लगभग ₹11,000 के करीब था जो की एक बजट ट्रिप के लिए बिलकुल परफेक्ट था।


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Sunday, 26 July 2020

भारत की टॉप 7 जगह जहाँ सुकून के साथ कुछ अडवेंचर भी चाहिए तो फिर क्यों न बंजी जंपिंग ट्राई की जाए?

भारत की टॉप 7 जगह जहाँ सुकून के साथ कुछ अडवेंचर भी चाहिए तो फिर क्यों न बंजी जंपिंग ट्राई की जाए?
लोगों को रोमांच चखने के लिए अलग,अनोखी, नई-नई चीज़ें को करने का शौक़ होता है। पर आमतौर पर तो हम ऑफिस की चारदीवारी के बीच कैद हफ्ते भर कामकाज में व्यस्त रहते हैं। इसलिए अपने आप को तरोताज़ा करने के लिए यह ज़रूरी है कि हम कुछ आउटडोर एक्टिविटी करें जिससे हमारी मानसिक थकावट दूर हो जाए। सारी चिंताओं को भुला देने कि लिए बंजी जंपिंग एडवेंचर का एक बेहतरीन तरीका बन गया है।

भारत में बंजी जंपिंग ने हाल ही में रोमांच के दीवानों के बीच अपनी जगह बनाई है।  इसका कारण है इसकी सुरक्षा में इज़ाफ़ा और इंटरनेट पर लोकप्रियता। मुझे पूरा यकीन है कि अगर आप अपने चारों ओर बँधी हुए रस्सी के साथ एक ऊँचाई से कूदें हैं तो आपके पास जीवन भर के लिए बताने के लिए पहले से ही कई कहानियाँ हैं। और अगर आपने अभी तक यह कोशिश नहीं की है,

 तो गर्मियां शुरू हो गई हैं और उसी के साथ लोगों की घूमने की प्लानिंग भी। चिलचिलाती गर्मी में अगर सुकून मिलता है तो बस हिल स्टेशन पर, लेकिन सुकून के साथ कुछ अडवेंचर भी चाहिए तो फिर क्यों न बंजी जंपिंग ट्राई की जाए? आज हम आपको उन जगहों के बारे में बताएंगे, जहा बंजी जंपिंग होती है और आप भी उसका लुत्फ उठा सकते हैं:

1. जंपिंग हाइट्स ,  ऋषिकेश
जनता के लिए पेशेवर बंजी जंपी करने का मौका देने वाली पहली कंपनियों में से एक, जंपिंग हाइट्स इसके नाम को सही साबित करती है। यह ऋषिकेश के पास मोहनचट्टी में भारत की सबसे ऊँची फिक्स्ड प्लेटफार्म वाला बंजी जंपिंग स्टेशन है । यहाँ बंजी को न्यूजीलैंड के डेविड अलार्डिस द्वारा डिजाइन किया गया है, और पेशेवर जंपिंग मास्टर्स को कूदने में सहायता के लिए रखा गया है।

 स्थान: मोहनचट्टी (ऋषिकेश से 25 कि.मी.)

कीमत: ₹3,500 

ऊँचाई: 83 मीटर


2. ओज़ोन एडवेंचर्स ,  बंगलौर
ऋषिकेश से उलट, बंजी जंपिंग के लिए यहाँ कोई फिक्स्ड प्लेटफार्म नहीं है। पूरा मंच एक 130 फीट ऊँचे मोबाइल क्रेन से जुड़ा हुआ है, जो कूद को थोड़ा और खतरनाक बना देता है। 18 से 60 वर्ष की उम्र के बीच कोई भी व्यक्ति इसे ट्राई कर सकता है।

स्थान: सेंट मार्क रोड, बेंगलुरु

मूल्य: ₹500 

ऊँचाई: 25 मीटर


3. वंडरलस्ट ऑपरेटर्स ,  दिल्ली 
"भारत का एकमात्र आधिकारिक बंजी ऑपरेटर" होने का दावा करते हुए, वेंडरलस्ट ऑपरेटर पूरे बंजी उपकरण किराए पर या बिक्री के लिए देता है। ये 1999 से भारत में बंजी जंपिंग करवा रहे हैं और क्रेन, पुल और टावर जंपिंग में एक्सपर्ट हैं।

स्थान: ग्रेटर कैलाश II, नई दिल्ली

मूल्यः 1500 रुपये

ऊँचाई: 25 मीटर



4. ग्रेविटी एडवेंचर ज़ोन ,  गोआ
भारत में सबसे सुंदर (और तर्कसंगत रूप से सबसे रोमांचकारी) बंगी जंप प्रदान करते हुए, गुरुत्वाकर्षण एडवेंचर जोन गोवा में सिर्फ शराब और नाइटलाइफ़ से ज्यादा लोगों की तलाश में लोगों के लिए एक जगह है। खूबसूरत अंजुना बीच के नजदीक स्थित, यह स्थान आमतौर पर पहली जगह है जहां ज्यादातर लोग भारत में बंजी कूदते हैं। हालांकि बहुत सुरक्षित और पेशेवर, मानसून के दौरान यहां कूदना चाहिए।

स्थान: मार्केट रोड, अंजुना घाटी

 मूल्यः ₹500 

ऊँचाई: 25 मीटर



5. डेला एडवेंचर ,  लोनावला
डेला एडवेंचर का दावा है कि ये "भारत का सबसे बड़ा एक्सट्रीम एडवेंचर पार्क" है, इसलिए अगर आप मुंबई में एक कॉर्पोरेट गुलाम हैं और एक पल के लिए अपनी साँसों की रफ्तार बढ़ाना चाहते हैं तो ऐसा करने के लिए यह बेस्ट जगह है। ये बंजी जंपिंग का एक वैकल्पिक और सुरक्षित ढंग से कराते हैं , जिसे बंजी ट्रैम्पोलीन कहा जाता है। आपने इसे कई मॉल में भी देखा होगा, लेकिन यहाँ पर सिर्फ 18 से ज्यादा उम्र वाले लोग ही हिस्सा ले सकते हैं , क्योंकि यह 28 मीटर ऊँचा है। ये आपको चारों ओर से कस कर एक लम्बी उड़ान पे भेजते हैं।

स्थान: ओल्ड हाईवे, कुनेगांव, लोनावाला

मूल्य: ₹500 रुपये

ऊँचाई: 28 मीटर



6. जगदलपुर ,  छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में जगदलपुर आखिरी जगह है जहाँ आप एक साहसिक खेल में शामिल होने की उम्मीद करेंगे, लेकिन आप यहाँ आने के बाद हैरान हो जाएँगे। बंजी जंपिंग की जगह वास्तव में पहाड़ की चोटी पर है, इसलिए जब आप कूदते हैं तो आपकी आँखों के सामने का नज़ारा आपको हैरान कर देगा। यह एक ऐसा स्थान भी है जहाँ बंजी जंपिंग सबसे सस्ता है, जो शायद आपको इस स्थान पर आने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस पर विश्वास करने के लिए इसका अनुभव करें।

स्थान: जगदलपुर

मूल्य: ₹300 

ऊँचाई: 30 मीटर



7. हिमवैली कैम्प्स ,  मनाली
मनाली की भीड़ वाली मॉल रोड से 5 कि.मी. से भी कम दूरी पर बहंग नामक एक शांत जगह है। सभी सुरक्षा उपायों की पूरी तरह से देखभाल की जाती है लेकिन हिमाचल की घाटियों में फ्री फॉल का यह अनुभव ऐसा है जो पहले ही आपके रोंगटे खड़े कर देगा।

स्थान: बहांग

मूल्य: ₹350 

ऊँचाई: 25 मीटर




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तोष , हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत गाँव जो दिल्ली वालो को अपनी ओर खिचता हैं.

' तोष , हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत गाँव जो दिल्ली वालो को अपनी ओर खिचता हैं.
लम्बी लम्बी मटमैली सड़कें, जिसके गड्ढों में रात का पड़ा पानी जमकर बर्फ़ बन गया है। दोनों ओर के ऊँचे पहाड़ों पर बर्फ़ मिठाई के चाँदी वाले कवर की तरह चमक रही है। उसके बीच में उगे हुए हैं पेड़, जो दूर से देखो तो चटख रंग के काँटे की तरह लगते हैं। छोटे छोटे घर हैं, जिनकी छत तिरछी टोपी की तरह बनी है, ताकि बर्फ़ ना टिक सके। कहीं भी कैमरा घुमाओ, हर तरफ़ ख़ूबसूरती लबालब भरी हुई है।
हिप्पी संस्कृति वाला तोष कुछ ऐसे ही स्वागत करता है आपका। और ये सारी बातें हवा हो जाती हैं, जब आप ख़ुद इस अनुभव को महसूस कर रहे होते हो। क्योंकि तब एक अनछुई सी ठण्ड आपको घेरे रहती है। चाय की टपरी की कड़क चाय और शानदार लगने लगती है, मैगी की भाप देखकर लालच बढ़ने लगता है, समझ नहीं आता पहले फ़ोटो खींचें या स्वाद चखें। आज मैं आपको उसी तोष के बारे में बताने वाला हूँ।

तोष में क्या- क्या करें
1. तोष में ही घूमने के लिए

तोष ख़ुद में घूमने के लिए बहुत बढ़ियाा एहसास है। हिप्पी संस्कृति से शायद पहली बार रूबरू होंगे आप। इस गाँव की ऊँचाई बहुत ज़्यादा है, इसलिए यहाँ पर मोटरबाइक के हिसाब वाली सड़क नहीं हैं। लेकिन अच्छी बात ये है कि घूमने के लिए आप पैदल ही हर जगह जा सकते हैं। सारी जगहें एक दूसरे के नज़दीक ही हैं।

सेब के बाग और हरे चारागाह, जहाँ चरवाहे अपने मवेशियों को चराने ले जाते हैं, देखने के लिए बहुत ही सुन्दर हैं।

2. पार्टियाँ
तोष मुख्य रूप से घुमक्कड़ों का अड्डा है। बैकपैकर्स आपको यहाँ हमेशा ही मिलेंगे। ऐसी ढेरों पार्टियाँ यहाँ होती रहती हैं।

3. ट्रेकिंग करने निकलें
ट्रेकिंग करने वालों के लिए यह जगह स्वर्ग है। वो इसका नाम कभी अकेले नहीं लेते, इसके साथ कभी खीरगंगा, तो कभी कसोल का नाम भी जुड़ा मिलता है। तोष, खीरगंगा, कसोल, मणिकरण, मलाणा और ढेर सारी भाँग, भोले बाबा की असीम कृपा है यहाँ पर। उनका कोई भी भक्त चाह ले, तो यहाँ से खाली हाथ नहीं जाता।

4. जमदग्नि ऋषि मन्दिर

साल में सिर्फ़ जनवरी फ़रवरी के कुछ दिनों के लिए यह मन्दिर खुलता है। गाँव के बीचों बीच स्थित इस मन्दिर के बरामदे से ऊपर देखो तो हिमालय ऊपर से ताकता हुआ मिलता है। तेज़ चिल्लाओ तो आवाज़ वापस आती है, लगता है पूरा हिमालय इस मन्दिर की रखवाली के लिए बैठा हो। अपने छोटे से तोष में इस मन्दिर में घूमने के लिए ज़रूर समय निकालना।

घूमने का सही समय

बहुत ऊँचाई पर बसा है तोष। समुद्रतल से 7,900 फ़ीट ऊपर। ठण्ड अपनी चरम सीमा पर होती है, तो किसी पर रहम नहीं खाती। वही बच पाता है, जो दिल का पक्का घुमक्कड़ होता है। घूमने का समय पूछो तो अप्रैल से अक्टूबर का समय सबसे बढ़िया रहेगा। अगर पक्के वाले घुमक्कड़ हो, दिल में जज़्बा है और ठण्ड से प्यार, तो पूरा साल आपका ही आपका है।

ठहरने के लिए
जैसे-जैसे करके यह जगह अपना नाम कमा रही है, पर्यटन बढ़ने से गेस्टहाउस और होटल्स भी इस तरफ़ अपने कदम जमा रहे हैं। इसलिए रहने की समस्या नहीं होगी आपको। पिंक फ़्लॉयड, अश्विन कैफ़े और होटल हिलटॉप, कुछ गिने चुने नाम हैं। इसके अलावा भी कुछ होमस्टे हैं, जिनके बारे में आपको देखना चाहिए।

स्वादघर

भारतीय, इटैलियन और यूरोपियन; तीन क़िस्मों का खाना यहाँ ख़ूब खाया जाता है। कई सारे कैफ़े में आपको पिज़्ज़ा और सैंडविच आसानी से मिलेंगे। तोष में आपको हर प्रकार का खाना मिल पाना अभी तो संभव नहीं है। लेकिन जगह इतनी ख़ूबसूरत है कि मैगी और चाय में भी बड़ी स्वाद होती है, जिसने खाया है, सबने गुण गाया है।

तोष कैसे पहुँचें

सड़क मार्गः दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट से मणिकरण के लिए बस पकड़ लीजिए और वहा से 16 किमी0 का छोटा सा ट्रेक है तोष, वहा से टैक्सी वाले ₹100 में आपको पहुँचा देंगे। तोष पहुंचने के बाद गाँव खोड़ा उचाई पर है तो आपको वहा पैदल ही जाना पड़ेगा! 

रेल मार्गः जोगिन्दर नगर रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है, जिसके लिए आपको टॉय ट्रेन कठुआ से मिलेगी।

हवाई मार्गः सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा भुंंतर का है, जहाँ से आपको तोष के लिए टैक्सी आसानी से मिल जाएंगी।




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