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Tuesday, 7 July 2020

भारत के सबसे खूबसूरत शहर जहाँ कम से कम एक बार तो जाना ही चाहिए! तो चलिए एक लिस्ट बनाते हैं

भारत के सबसे खूबसूरत शहर जहाँ कम से कम एक बार तो जाना ही चाहिए! तो चलिए एक लिस्ट बनाते हैं 

वैसे तो पूरा भारत ही खूबसूरती की खदान है; कहीं उँचे पहाड़ों से घिरे गाँव तो कहीं समुद्र की लहरों को ताकते शहर, हर तरह का नज़ारा है यहाँ। मैं तो आपको भारत के हर कोने को घूम कर जानने और समझने की सलाह दूंगा, लेकिन ये करना शायद थोड़ा मुश्किल हो सकता है। तो चलिए एक लिस्ट बनाते हैं भारत के उन सबसे खूबसूरत शहरों की जहाँ कम से कम एक बार तो जाना ही चाहिए!

1. गुलमर्ग

'धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है' कश्मीर के बारे में कही गई ये बात आपको गुलमर्ग में सच होती दिखाई देती है।

गुलमर्ग जाने का सही वक्त: अक्टूबर से फरवरी


2. उदयपुर
झीलों के शहर के नाम से मशहूर ये जगह राजसी ठाठ-बाट और प्राकृतिक खूबसूरती का संगम है। यहाँ की खातिरदारी के बीच आप भी किसी राजा-महाराजा की तरह ही महसूस करेंगे।

उदयपुर जाने का सही समय: जुलाई से सितंबर


3. गैंगटॉक
उत्तर पूर्वी भारत कैनवस पर उतारी किसी पेंटिंग की तरह है और ये पेंटिंग गैंगटॉक में मानो जी उठती है। दुनिया के तीसरी सबसे उँची चोटी कंचनचंगा का दिलकश नज़ारा यहीं से मिलता है।


गैंगटॉक जाने का सही समय:अक्टूबर से फरवरी


4. मैसूर

  
मैसूर पैलेस की खूबसूरती और विशालताको देखकर आपको अपने होश संभालने पड़ सकते हैं। आखिर यू ही इसे महलों का शहर नहीं कहा जाता!

मैसूर जाने का सही समय:अक्टूबर से मार्च


5. दिल्ली 

मुग़लों की विरासत समेटे, दिल्ली में इतनी नायाब एतिहासिक इमारतें हैं कि आप गिनने भर से ही थक जाएँगे। लाल किले से लेकर, जामा मस्जिद और कुतुब मिनार तो पूरी दुनिया में मशहूर हैं।


दिल्ली जाने का सही समय: नवंबर से फरवरी


6. चंडीगढ़

'सिटी ब्यूटिफुल' यानी खूबसूरत शहर के नाम से मशहूर चंडीगढ़ की शांति, साफ हवा और सड़के देखकर आपका दिल भी चंड़गढ़ से आशिकी कर लेगा।

चंडीगढ़ जाने का सही समय: अगस्त से नवंबर


7. पॉन्डिचेरी

अगर फ्रांस बिना जाए फ्रांसिसी वास्तुकला का आनंद लेना है तो पॉन्डिचेरी की टिकट बुक करा लो। यहाँ के बीच भी विदेशी बीच से कम नहीं हैं।

पॉन्डिचेरी जाने का सही समय: अक्टूबर से फरवरी


8. शिमला

बर्फ की सूर्ख चादर ओढ़े इस शहर को अगर आपने नहीं देखा, तो समझिए आपकी घुमक्कड़ी अधूरी ही रह गई। सिर्फ पहाड़ और मॉल रोड ही नहीं, यहाँ बनी ब्रिटिश इमारतें भी आपका दिल जीत लेंगी।


शिमला जाने का सही समय: मार्च से जून


9. मुन्नार

मुन्नार को दक्षिण भारत का कश्मीर कहा जाता है। यहाँ के दिलकश नज़ारे की एक झलक देखते ही आप इस शहर को दिए नाम को बिल्कुल सटीक मान लेंगे।

मुन्नार जाने का सही समय: दिसंबर से फरवरी


10. अंडमान

भारत में ही रहकर अगर मालदीव की सैर करनी है तो अंडमान है ना। साफ नीला समुद्र, सफेद रेत वाले तट और रोमांच के लिए बहुत कुछ, यहाँ जाना तो बनता है!

अंडमान जाने का सही समय: अप्रैल से जून


11. आगरा

पूरी दुनिया को प्यार की मिसाल देता ताज महल वो इमारत है जिसे असल ज़िंदगी में देखने के लिए हर कोई आगरा आने को बेताब रहता है। हो भी क्यों ना, ये दुनिया के 7 अजूबो में से एक जो है।

आगरा जाने का सही समय: अगस्त से अक्टूबर



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शुभ शगुन टूरिज़म
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Monday, 6 July 2020

अगर छुट्टीयां पलान की हैं तो भारत की इन 8 जगहों के बारे में जान लो!

अगर छुट्टीयां पलान की हैं तो भारत की इन 8 जगहों के बारे में जान लो!

मुसाफिर अंजाने रास्तों पर चलने और नई जगहों को खोजने में कभी नहीं घबराते | घूमना-फिरना कुछ ऐसे बेहतरीन पाठ पढ़ा देता है जिसके दम पर ये कहीं भी यूँ घुल जाते हैं जैसे चाय में चीनी! हर याद एक कहानी बन जाती है जो मुसाफिरों की ज़िंदगी की किताब में जुड़कर इसे और दिलचस्प कहानी बना देती है |
मगर इससे पहले कि आप अपने आप को एक मन्झा हुए मुसाफिर का अवार्ड खुद ही दे दें, ये बताएं कि क्या आपने इन जगहों का सफर किया है?


1. जम्मू कश्मीर में बंजारों सा जीवन
झरने, चरागाह, पहाड़ और पहाड़ों से निकलती नदियाँ | कश्मीर इतना खूबसूरत है कि बयान करने के लिए लफ्ज़ नहीं जुड़ते | भारत के उत्तर में स्थित इस राज्य में आप यहाँ की हरी-भरी वादियों में खो जाएँगे | सर्दियों के मौसम में राज्य की राजधानी जम्मू में आप वैष्णो देवी माँ के दरबार में जाते श्रद्धालुओं को देखेंगे तो लद्दाख में नज़र आएगा हज़ारों रंग बदलता आसामान| जम्मू कश्मीर जाकर ही आप जान सकेंगे कि आखिर क्यों इसे धरती पर स्वर्ग कहा जाता है।


2. उत्तराखंड की पहाड़ियों में बैकपैकिंग
कहते हैं जितना जानोगे, उतना लगेगा कि तुम कितना कम जानते हो | वैसे तो उत्तराखंड को हिमाचल का छोटा भाई माना जाता है , मगर इसका ये मतलब नहीं कि ये किसी भी रूप में हिमाचल से पीछे है | उत्तराखंड में मस्ती करने के लिए आपको खुलकर घूमना होगा| यहाँ आपको रोमांचक खेल भी मिलेंगे तो शांत हिल स्टेशन भी | ऋषिकेश में राफ्टिंग, जिम कॉर्बिट में बाघ दर्शन, औली में स्कीइंग, दुनिया के सबसे ऊँचे शिव मंदिर तुंगनाथ की चढ़ाई आदि आपको रोमांच का एक अलग एहसास करवाएँगे |


3. जब पर्वत पुकारे तो निकल जाइए- हिमाचल 
प्रदेश


ये राज्य इतना सुंदर है कि आपको पहली नज़र में ही प्यार हो जाएगा | वैसे तो बहुत से मुसाफिर हिमाचल जाते हैं, मगर आज भी हिमाचल के कई हिस्से ऐसे हैं जो लोगों की पहुँच से दूर हैं | यहाँ के पहाड़ी गाँव सभ्यता की एक नई तस्वीर पेश करते हैं और नीले आसमान में तैरते बादल रूई के टुकड़ों जैसे लगते हैं | बहुत से सैलानी और नवविवाहित जोड़े हिमाचल घूमने जाते हैं मगर यहाँ के अनछुए हिस्सों तक नहीं पहुँच पाते | ज़िंदगी में एक बार तो अकेले हिमाचल ज़रूर घूमिए |


4. लक्षद्वीप के साफ समंदर में गोताखोरी

ये उन लोगों के लिए है जिन्हें पानी के अंदर मज़ा आता है | लक्षद्वीप समूह भारत के दक्षिण-पश्चिम में बसा हुआ है | अगर आपको समुद्रतट और वाटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो लक्षद्वीप से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती | एक द्वीप से दूसरे द्वीप घूमते हुए यहाँ जलीय जंतुओं की कई प्रजातियाँ देखी जा सकती है |


 5. हिन्दुस्तान का दिल देखो - मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों के अलावा भी बहुत कुछ है | यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवन आपको हैरान कर देंगे | यहाँ के रिज़र्व और अभयारण्य देखने ले लिए एक बढ़िया सा रिज़ोर्ट बुक करवाए, सुकून से रहते हुए जंगलों में सफारी के लिए जाएँ |


6. शांति का प्रतीक- अरुणाचल प्रदेश
भारत की विविध संस्कृतियों में उत्तर-पूर्वी राज्यों की बात ना की जाए तो जमेगा नहीं | और अगर बात करें अरुणाचल प्रदेश की, तो ये समझना ज़रूरी है कि इस राज्य की संस्कृति अनुभव करने दुनिया भर से लोग आते हैं |अरुणाचल में घूमते हुए आप समय का हिसाब रखना भूल जाएँगे क्योंकि इस जगह को ऊपरवाले ने कुदरती खूबसूरती से नवाज़ा है |



7. राजस्थान में राजसी शान-ओ-शौकत का एहसास
आज भी लोग इस राज्य में राजसी कहानियाँ बड़ी दिलचस्पी से सुनाते हैं | राजस्थान में वास्तुकला के नायाब नमूने हैं जिन्हे देख कर आपको राजाओं की शान-ओ-शौकत का अंदाज़ा लगेगा | रंगीन पगड़ियों और रेत के सुनहरे टीलों का संगम बड़ा ग़ज़ब लगता है | राजस्थान जैसे विशाल राज्य में हों और राजसी ठाठ-बाट से मौज ना करें, ऐसा नहीं हो सकता |


8. कुछ दिन तो गुज़ारिये गुजरात में, कच्छ के रण में

अगर भारत में ज़्यादा नहीं घूमें है तो ये जगह आपके होश उड़ा देगी | कच्छ के रेगिस्तान में दूर-दूर तक फैला सफेद नमक चाँदनी रात में जन्नत का एहसास दिलाता है | इसे दुनिया का सबसे बड़ा नमक का रेगिस्तान भी माना जाता है | मानने की बात करें तो भारत में बर्ड वाचिंग के लिए सबसे बढ़िया जगह भी इसे ही माना जाता है | नवंबर से फ़रवरी के महीनों में जाएँगे तो बहुत से अनोखे पक्षी देख पाएँगे |
भारत यूँ तो एक देश है मगर यहाँ बैकपैकिंग करते हुए किसी महाद्वीप में घूमने जैसा महसूस होता है | तो अच्छे से घूमिये और नई चीज़ें अनुभव कीजिए, क्योंकि ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा |





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Friday, 3 July 2020

उत्तराखंड पहाड़ों की गोद में बसी ऐसी ही एक मज़ेदार और रोचक कहानी है स्वर्ग की सीढ़ियों की!

उत्तराखंड पहाड़ों की गोद में बसी ऐसी ही एक मज़ेदार और रोचक कहानी है स्वर्ग की सीढ़ियों की! 
अगर आप इतिहास में रूचि रखते हैं तो आप भारत में जहाँ भी जाएँ आपको इतिहास के ऐसे अजीब किस्से कहानियाँ मिलेंगी जो की आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी। हर पर्वत, हर पहाड़ और हर नदी के साथ जुडी हैं कहानियाँ। और अगर देव भूमि उत्तराखंड में घूमने की बात करें तो यहाँ पर तो हैरान करने वाली दिलचस्प कथाओं का कोई अंत ही नहीं है।

पहाड़ों की गोद में बसी ऐसी ही एक मज़ेदार और रोचक कहानी है स्वर्ग की सीढ़ियों की! इस कहानी के बारे में आपने अक्सर समाचार चैनलों में डाक्यूमेंट्री दिखी होगी। मुझे कभी इस जगह को लेकर खास दिलचस्पी नहीं हुई, लेकिन मेरा ये खयाल तब बदल गया जब मैंने गढ़वाल में वैली ऑफ फ्लावर के सफर के दौरान अपनी यात्रा को एक नया मोड़ देकर बद्रीनाथ जाने की सोची। मैंने इन पौराणिक कथाओं से जुड़ी जगहों को करीब से देखा और जाना। इससे जुड़ी दिलचस्प कहानियों को माना गाँव के लोगों से सुना, ये ही वो गाँव है जहाँ से स्वर्गारिहिनी और सतोपंथ झील ट्रेक की शुरुआत होती है।

क्या है कहानी स्वर्ग की सीढ़ियों की?
महाभारत के 18 अध्यायों में 17वे अध्याय, महाप्राथनिका पर्व, में लिखा है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पाँचों पांडव भाइयों ने अपनी पत्नी द्रौपदी में साथ सन्यास ले लिया और महल और राज्य को छोड़, तपस्या के लिए निकल पड़े। तपस्या का ये सफर उन्हें हिमालय के पहाड़ों के बीच ले आया। स्वर्ग की और अपने इस आखिरी सफर पर बढ़ते हुऐ हर किसी को एक-एक कर अपने कर्मों का फल मिलने लगा। सबसे पहले द्रौपदी की मृत्यु हुई। उनका दोष था बाकियों के मुकाबले अर्जुन से उनका ज्यादा प्रेम। सहदेव इस यात्रा को पूरा न कर सके और मारे गए क्योंकि उनको अपने ज्ञान पर बहुत घमंड था। इसके बाद नकुल और अर्जुन की मृत्यु हुई जिसका कारण भी उनका अभिमान था। फिर भीम की बारी आयी और उनका दोष था उनका लालच।
 
ये लम्बी यात्रा पांडवों को हिमालय की गोद तक ले कर तो गयी पर युधिष्ठिर को छोड़ एक-एक कर सबकी मृत्यु हो गयी। यह माना जाता है की एक कुत्ते के भेस में छुपे धर्म के साथ युधिष्ठिर ने स्वर्ग की सीढ़ियां यहीं चढ़ी थी। महाभारत के इस अंश में यह भी बताया जाता है कि बिना मानवीय शरीर छोड़े यही स्वर्गरोहिणी का रास्ता है जहाँ से आप स्वर्ग जा सकते हैं।

सतोपंथ झील और स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर तक का सफर
 जून और अगस्त के महीने में अगर आप बद्रीनाथ आएँगे तो आपको ऐसे कई साधू संत मिलेंगे जो बद्रीनाथ से सतोपंथ और स्वर्गरोहिणी का सफर तय करते हैं। माना जाता है कि सतोपंथ झील का यह सफर असली मायने में सत्य के पथ की यात्रा है। स्वर्गरोहिणी तक की यात्रा के बारे में माना जाता है कि ये साक्षात स्वर्ग के मार्ग पर चलने के बराबर है। यहाँ आने वाले सभी हिन्दू तीर्थयात्री यह मानते हैं कि मानवीय शरीर के साथ अगर आप पूरी धरती में कहीं से भी स्वर्ग जा सकते हैं तो वो स्वर्गरोहिणी ग्लेशियर का मार्ग है।
सुबह-सुबह बद्रीनाथ धाम में एक भव्य पूजा-अर्चना के बाद यहाँ से सभी साधू संत अपनी यात्रा शुरू करते हैं। बद्रीनाथ से 4km की दूरी पर माना गाँव है। ये गाँव इस रास्ते पर पड़ने वाला आखिरी गाँव है जहाँ आपको इंसानी सभ्यता मिलेगी। ये गाँव भारत-चीन की सीमा का आखरी गाँव भी है। श्रद्धलुओं के लिए रास्ते में रुकने के लिए बहुत-सी जगह हैं जैसे नाग- नागिनी मंदिर, भृगु गुफा और माता मूर्ति मंदिर जो धर्म के देवता की पत्नी को समर्पित है। अलकनंदा के साथ- साथ चलें तो इस रास्ते में आगे आता है आनंदवन। यहाँ के नज़ारेऔर दूर-दूर तक हरे पेड़ और घास के मैदान देख कर आपको एहसास हो जाएगा कि आखिर इस जगह को आनंद-वन क्यों कहा जाता है। यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर है वसुंधरा जल प्रपात। हालांकि इस रास्ते में सभी रुकने की जगहों के बारे में किस्से और कहानियां हैं पर वसुंधरा के बारे में एक दिलचस्प कथा काफी मशहूर है। लोग यह मानते हैं की किसी भी दोषी या पापी के सर पर वसुंधरा का पानी नहीं गिरता।
इस यात्रा में आगे आता है लक्ष्मी वन। लक्ष्मी वन जाना जाता है भोज पत्र के घने पेड़ों के जंगल के लिए। प्राचीन काल में इन भोज पत्र के पेड़ों की छाल पर ही कई ग्रन्थ लिखे गए थे। माना जाता है कि पांडवों की यात्रा के दौरान नकुल की मृत्यु लक्ष्मी वन में ही हुई थी। स्वर्गरोहिणी जाने वाले यात्री पहली रात इसी लक्ष्मी वन में रुकते हैं।
लक्ष्मी वन से अगले दिन कुछ ही दूर चलकर यात्री सहस्त्रधारा पहुँचते हैं। ग्रेनाइट के एक टीले से गिरता हुआ ये झरना सचमुच मन छू लेता है। पांडवों के एक और भाई सहदेव की मृत्यु यहाँ हुई थी। इस जगह से आगे बढ़कर आस-पास के नज़ारे और भी सुन्दर हो जाते हैं। अगर आप मैप में देखें तो आप इस वक़्त ठीक केदारनाथ के पीछे वाली पहाड़ी पर होंगे। इस यात्रा में अगली जगह है चक्रतीर्थ गुफाएं। काफी लोग रात यहाँ बिताना भी पसंद करते हैं पर अगर आप चल सकें तो यहाँ से कुछ ही दूरी पर सतोपंथ झील है और रात वहाँ बिताना ज्यादा बेहतर होता है। सतोपंथ झील के बारे में किस्से कहानियां बहुत हैं पर ये वो जगह भी है जहाँ भीम ने अपनी अंतिम सासें ली थी। सैलानी यहाँ आकर रात को साधु संतों की झोपड़ियों में रात बिताते हैं। कुछ लोग अपने लिए गुफाएँ ढूंढ लेते हैं या टेंट बना लेते हैं।
सतोपंथ झील में एक दिन बिताने के बाद आगे बढ़ कर लोग स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर के दर्शन करने जाते हैं। ज्यादातर यात्री सतोपंथ से ही वापस चले जाते हैं, पर इस रास्ते पर आगे चंद्र कुंड और सूर्य कुंड के दर्शन करके स्वर्गरोहिणी साफ़-साफ़ दीखता है। इस ग्लेशियर के सीढ़ीनुमा आकार को ही स्वर्ग की सात सीढ़ियां माना जाता है। हालाँकि किसी भी समय पर यहाँ कोहरे और बर्फ के कारण तीन से ज्यादा सीढ़ियां नहीं दिखती हैं।
कैसे कर सकते हैं ये यात्रा?

बद्रीनाथ के आस-पास ऐसे बहुत सारे ट्रेक्स हैं जहाँ लोग आज भी जाते हैं। फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब में तो लोगों का तांता लगा ही रहता है, पर कम ही लोग जानते हैं की बद्रीनाथ से वसुंधरा फॉल्स, सतोपंथ झील और स्वर्गरोहिणी ग्लेशियर तक भी ट्रैकिंग की जा सकती है। इसके लिए बद्रीनाथ पहुंचने पर वहां मौजूद ट्रैकिंग एजेंसी में आप बात कर सकते हैं। कई ट्रैकिंग एजेंसी हैं जो आपको इस यात्रा में ले जा सकती हैं.





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