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Wednesday, 5 August 2020

' चेरापूंजी ,1484 मीटर ऊँचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन खासतौर से हमेशा बादलों की धुंध से सरोबार रहता है,

' चेरापूंजी ,1484 मीटर ऊँचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन खासतौर से हमेशा बादलों की धुंध से सरोबार रहता है,

चेरापूंजी हिल स्टेशन की इन्द्रधनुषी सुंदरता का कोई जोड़ नहीं। शायद इसीलिए चेरापूंजी देश के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में गिना जाता है। मेघालय के उत्तरी-पूर्व इलाका का यह हिल स्टेशन अपनी भव्यता-दिव्यता के साथ ही सुरम्यता के लिए भी जाना जाता है। चेरापूंजी हमेशा बादलों की धुंध से सरोबार रहता है, लिहाजा शांत और शीतल परिवेश रहता है। समुद्र तल से करीब 1484 मीटर ऊँचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन खासतौर से मानसून के लिए विलक्षणता के लिए जाना पहचाना जाता है। चेरापूंजी  की सुंदरता की वजह से इसने दुनिया में अपनी विशेष जगह बनाई।

चेरापूंजी
मॉनसून के साथ ही बादलों का खिलंदड़पन भी चेरापंजी को खास बनाता था। ये चैंकाने वाली बात है कि चेरापूंजी में बारिश रात में होती है। चेरापूंजी को सोहरा भी कहा जाता है। चेरापूंजी से शिलांग की दूरी 53 कि.मी. है। मैं उसी चेरापूंजी की सड़क पर दौड़ रहा था जिसके बारे में बचपन से पढ़ा था कि इस जगह पर सबसे ज्यादा बारिश होती है। मैंने कभी नहीं सोचा था लेकिन अब चेरापूंजी में था तो बहुत खुश था।

शिलांग से चेरापूंजी आने का रास्ता बेहद प्यारा है। रास्ता उपर जाता जा रहा था ये वैसा ही था जैसा पहाड़ों में होता है। आसपास सुंदर पहाड़ और घाटी थी और उनको देखते हुए हम आगे बढ़ते जा रहे थे। दो पहाडों के बीच की घाटियों में भरे पड़े थे अनानास के पेड़ और कुछ ऐसे पेड़ भी थे जिनको मैं पहली बार देख रहा था। अनेक तरह की फर्न, सुंदर पत्तियों वाले इन पौधों को देखकर मन कर रहा था, इनको साथ ले चलूँ। ये पहाड़ बद्रीनाथ और केदारनाथ के पहाडों जैसे ऊँचे नहीं थे। कुछ आगे बढ़े तो रास्ते में एक झरना मिला, ये खूबसूरती है चेरापूंजी की। आपको रास्ते में वो चीज़ दिखा देगी जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। इसके बाद तो रास्ते में कई खूबसूरत लेकिन हम हर जगह रूके नहीं।
पहाड़ों के बीच से गिरता झरना वाकई खूबसूरत नज़ारा लगता है। इसको देखने के बाद लगता है कि प्रकृति वाकई आश्चर्य से भरी हुई है। हम जहाँ खड़े थे वहाँ से झरने की पतली धारा दिखाई दे रही थी। यहाँ आसपास चीड़ और एरोकेरिया के पेड़ों की भरमार थी, यहाँ के जंगलों में देवदार नहीं दिखाई दे रहा था। शिलांग से चेरापूंजी की दूरी बहुत कम है लेकिन पहुँचने में काफी वक्त लगता है। इसकी वजह है वहाँ तक का पहुँचने का खूबसूरत रास्ता। जब डगर इतनी खूबसूरत हो तो हर कोई यहाँ रूकना चाहेगा। आपका मन बार-बार गाड़ी को ब्रेक लगाने का करेगा। इस इलाके में बहुत बारिश होती है और उसका असर हम यहाँ की हरियाली पर देख पा रहे थे। रास्ते में पहाड़ों में कुछ फसलें भी दिखाई दे रही थीं जो देखने में बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

पूर्वी खासी की पहाड़ियों में फैले हरे-भरे घने जंगल, पतली नदियाँ, पहाड़ी ढलानों में दिखती फसलें, ये सब इस रास्ते को और भी खूबसूरत बना देते हैं। यहाँ के सदाबहार जंगलों की ही वजह से ही शायद इसे स्काॅटलैंड ऑफ ईस्ट कहा जाता है। ऐसे ही खूबसूरत नज़ारों को देखते-देखते हम चेरापूंजी पहुँच गए। चेरापूंजी की समुद्र तल से ऊँचाई 1,300 मीटर है। इस हिल स्टेशन में कई प्रकार के वनस्पति देखने को मिले। यहाँ कई तरह की फर्न, स्थानीय फल जैसे चेसनट और अनानास के पेड़ तो बहुत हैं। यहाँ कुछ विशेष फूल भी देखने को मिले। नागफन और ढक्कन वाले फूल तो विशेष थे ही, साँप सा दिखने वाला एक फूल भी यहाँ के आकर्षण का केन्द्र है।

नोहकलिकाई वाॅटरफाल
चेरापूंजी हिल स्टेशन बंग्लादेश की सीमा से जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से पर्यटक वहाँ की खूबसूरती का अंदाजा चेरापूंजी से भी करते हैं। चेरापूंजी  से कुछ ही दूरी पर नोहकलिकाई वाॅटरफाल है, जो चेरापूंजी की सबसे फेमस जगह है। नाहकलिकोई वाॅटरफाल के बारे में एक कहानी भी है। हज़ारों फीट ऊपर से गिरता यह दूधिया झरना अपने में एक मार्मिक कथा समेटे हुए है। कहा जाता है कि लिकाई नाम की एक महिला जब एक दिन अपने काम से घर लौटी तो उसने अपने पति से पूछा कि उसका बेटा कहाँ है? पति बोला, मैंने उसे काटकर खाने के लिए पका लिया है। ये सुनते ही लिकाई पागल हो गई और और झरने में कूदकर अपनी जान दे दी। तब से इस जगह झरने का नाम नोहकलिकाई पड़ गया। इस झरने की सुंदरता टूरिस्टों को काफी लुभाती है, इसके अलावा यहाँ कई प्राचीन और सुंदर गुफाएँ भी हैं। इन गुफाओं की सुंदरता देखते ही बनती है। इनमें कई गुफाएँ तो कई किलोमीटर लंबी हैं।

चेरापूंजी में खायर जनजाति के लोग रहते हैं। यहाँ के लोगों ने बताया कि चेरापूंजी का पुराना नाम सोहरा है। जब यहाँ अंग्रेज़ आए तो वो इस जगह को चुर्रा बुलाने लगे। बाद में चुर्रा से चेरा हुआ और अब ये चेरापूंजी के नाम से फेमस है। अब फिर से चेरापूंजी से सोहरा कर दिया गया है लेकिन लोग चेरापूंजी ही बुलाते हैं। चेरापूंजी हिल स्टेशन में डेविड स्काॅट का स्मारक है जो देखने लायक है। इसके अलावा चेरापूंजी की कुछ परंपराओं को भी जानने का मौका मिला। चेरापूंजी में शादी की एक अलग परंपरा है, इस परंपरा के अनुसार फैमिली की सबसे छोटी बेटी की संपत्ति की वारिस होती है।

मास्मसा गुफा
ये सब देखते-समझते हआ मैं यहाँ की फेमस गुफा मास्मसा को देखने के लिए निकल पड़ा। यहाँ आकर अलग रोमांच पैदा होता है, ये प्रकृति का अद्भुत आयाम है। प्रकृति की अपनी विशिष्ट और अनोखी रचनाएँ है ये गुफाएँ। पत्थरों ने गुफा के अंदर कई आकार लिए हैं। कहीं हाथी, घोड़ा, हिरण तो कहीं फूल और पक्षी कुछ इस तरह से बने हुए हैं जिन्हें देखे बिना आप आगे बढ़ ही नहीं सकते हैं। इसी गुफा में एक मूर्ति है जिसमें हजारों फन का साँप बना हुआ है, पास में ही एक शिवलिंग बनी हुई है। हम जब गुफा में घुसे तो घुटनों तक पानी भरा था और जो इस गुफा को ठंडा भी बनाए हुआ था। पत्थरों की ऊँची-नीची, चिकनी तो कहीं सकरी और चैड़ी आकृतियों पर चलना और चढ़ना मुश्किल तो था लेकिन मज़ा आ रहा था। यहाँ के स्थानीय लोग बता रहे थे कि पहले यहाँ अंधेरा रहता था लेकिन अब सरकार ने यहाँ लाइट की लगवा दीं हैं।

चेरापूंजी घुंघराली पर्वत श्रंखला और बादलों की धमाचैकड़ी के लिए खासतौर से फेमस है। घुमावदार बादलों से घिरा चेरापूंजी  सुंदरता के नायाब रंग बिखेरता है। जिसे देखकर मैं मोहित हो गया था, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी। चेरापूंजी के पुल प्राकृतिक होते हैं, यहाँ आकर लग रहा था हम प्रकृति की गोद में हैं। इन प्राकृति पुलों की मज़बूती बेमिसाल होती है। पेड़ की जड़ों से जुड़ने वाले ये छोटे-छोटे पुल में सच में देखने लायक हैं। ये कोई अचानक से अपने-आप नहीं बनते हैं, इनको यहीं के लोग प्रकृति के साथ मिलकर बनाते हैं। इस पारंपरिक तकनीक से पुल बनाने में लगभग 10 से 15 वर्ष का समय लगता है।

चेरापूंजी भारत के उन जगहों में आता है, जहाँ सबसे ज्यादा बारिश होती है। जिसकी वजह से ये हिल स्टेशन देश और दुनिया के सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। ये कहना सही होगा कि चेरापूंजी हिल स्टेशन सुंदरता, आश्चर्यजनक पहलुओं और प्रकृति का विलक्षण आयाम है। चेरापूंजी हिल स्टेशन को बादलों का निवास स्थान कहा जाता है। चेरापूंजी में घूमते-घूमते मैं इस बात का एहसास भी कर रहा था। इस हिल स्टेशन के पास बहुत कुछ है जहाँ जाया जा सकता है। इसमें खासतौर पर आपको मासस्मा गुफा, क्रेम माल्मलह गुफा, सात बहनों का झरना, क्रेम फिलेट, नेशनल पार्क ज़रूर जाना चाहिए।

कैसे पहुँचे चेरापूंजी?

चेरापूंजी जाना बहुत आसान है और इसके लिए आप कोई भी साधन चुन सकते हैं। अगर आप फ्लाइट से आना चाहते हैं तो सबसे निकटतम एयरपोर्ट गुवाहटी है। गुवाहटी से चेरापूंजी की दूरी 181 कि.मी. है। अगर आप टेन से आने की सोच रहे हैं तब भी सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन गुवाहटी ही है। इसके अलावा आप सड़क मार्ग से भी चेरापूंजी पहुँच सकते हैं।


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Friday, 31 July 2020

भारत की 10 बेहतरीन हनीमून डेस्टिनेशन जहाँ आपको हर तरह की खूबसूरती और नज़ारे मिलेंगे!

हनीमून की प्लानिंग करते वक्त दिमाग में ज़्यादातर विदेशी जगहें ही आती हैं, चाहे वो अटलांटिक का नीला-हरा समंदर हो या यूरोप की खूबसूरत इमारतें। लेकिन जो लोग दुनिया घूम कर आ चुके हैं वो इस बात का दावा कर सकते हैं कि भारत एक ऐसी जगह है जहाँ आपको हर तरह की खूबसूरती और नज़ारे मिलेंगे। यानी हनीमून के लिए भी भारत एक पर्फेक्ट डेस्टिनेशन है।


थार का रेगिस्तान हो, वायनाड की सुंदरता हो या अंडमान के बीचेज़, अपने पार्टनर के साथ कुछ हसीन पल बिताने के लिए सब कुछ है यहाँ। तो अपने हनीमून डेस्टिनेशन के बारे में एक बार फिर से सोचें और फॉरन ट्रिप पर मोटी रकम खर्चने के बजाय इंडिया के बेस्ट हनीमून डेस्टिनेशन का प्लान बनाएँ और सही वक्त का इंतज़ार करें। कौन- सी हैं जगहें, चलिए बताते हैं:


1.जम्मू और कश्मीर

कश्मीर की तो हवाओं में ही रोमांस है। शायद इसीलिए ये भारत की सबसे पसंदीदा हनीमून डेस्टिनेशन में से एर है। एक ओर डल झील की शांती तो दूसरी तरफ लहरों पर तैरते बाज़ारों की हलचल, एक अनूठा संगम है। घाटी में कालीन बुनकरों और लकड़ी के नक्काशी करने वाले कारीगरों का काम देख लेंगे तो हैरान रह जाएँगे। कश्मीर के मंदिर जितने भव्य हैं उतने ही सुंदर हैं यहाँ के बाग, जितने हरे-भरे खेत हैं उतनी ही दिलकशन के बर्फ में नहाई वादियाँ।


कश्मीर में क्या करें

डल झील

डल झील पर शिकारे की रोमांटिक सवारी का आनंद लें

गुलमर्ग

गुलमर्ग में दुनिया के सबसे ऊँचे गोल्फ कोर्स की सैर करें

पटनीटॉप 

शहर से दूर पटनीटॉप की ऊँची पहाड़ी पर एक दिन बिताएँ

मुगल गार्डन

शंकराचार्य मंदिर और सुंदर मुगल गार्डन की यात्रा करें

उत्तर भारत में बर्फ से ढकी चोटियों और तैरते शिकारों के बीच शांति पसंद करने वाले जोड़ें कश्मीर को अपनी हनीमून डेस्टिनेशन चुनें

घूमने का सबसे अच्छा समय: दिसंबर से फरवरी, अगरआप बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं, तो अप्रैल से अक्टूबर।

कश्मीर कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: आप शहर से 14 कि.मी. दूर स्थित श्रीनगर हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर सकते हैं। दिल्ली, मुंबई और जम्मू से श्रीनगर के लिए दैनिक उड़ानें हैं।

रेलमार्ग से: जम्मू रेलवे स्टेशन कश्मीर के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो देश के सभी मुख्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से: राष्ट्रीय राजमार्ग 1-A श्रीनगर को जम्मू से जोड़ता है।


2. औली

औली भारत का उभरता हुई स्की डेस्टिनेशन है, लेकिन कुछ हटके और अनूठी जगहों को पसंद करने वाले लोगों में ये हमेशा से काफी लोकप्रिय रहा है। चारों तरफ बर्फ के नज़ारे सर्दियों में स्की करने को रोमांचक बनाते हैं तो गर्मियों में हरी घास के खुले मैदान शाम बिताने के लिए एक बढ़िया जगह हैं। शंकुधारी और ओक के जंगलों से घिरा, नंदा देवी और नर पर्वत पर गाड़ी के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है, चाहे तो जोशीमठ से केबल कार की सवारी कर भी ये दूरी तय की जा सकती है।

ऑली में क्या करें

दुनिया की सबसे ऊँची मानव निर्मित झील, औली झील का मज़ा लें

औली रोपवे के ज़रिए समुद्र तल से 3,010 मीटर की ऊँचाई तय करें

गुरसो बुग्याल की रहस्यमयी रास्तों पर ट्रेक करें

औली के सुंदर बर्फ से ढके नज़ारों के बीच स्की करें

जिन कपल्स को एडवेंचर पसंद है उनके लिए ऑली बढ़िया हनीमून डेस्टिनेशन है


घूमने का सबसे अच्छा समय: नवंबर से मार्च


औली कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो औली से लगभग 279 कि.मी. दूर है। यह एक घरेलू हवाई अड्डा है। निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय है।

रेल मार्ग से: औली से निकटतम रेलहेड ऋषिकेश के पास बना रायवाला स्टेशन है, जो 250 कि.मी. दूर है। यहाँ से सुबह-सुबह आपको औली तक जाने वाली बस और टैक्सी मिल जाएँगी।

सड़क मार्ग से: औली जोशीमठ से केवल 16 कि.मी. की दूरी पर है और यहाँ से राज्य परिवहन की बसे लगातार चलती रहती हैं। जोशीमठ से औली के लिए बस और टैक्सी दोनों सेवाएँ उपलब्ध हैं।


3. जैसलमेर

जैसलमेर रेतीले रेगिस्तान की राजसी गौरव है। सुनहरे बलुआ पत्थर से बना जैसलमेर किला, रेगिस्तान के बीच ऐसे सीना ताने खड़ा है मानों पूरा शहर इसी में समा जाए। जीवाश्म, प्राचीन इतिहास, कला और संस्कृति और यहाँ तक ​​कि भारत-पाकिस्तान सीमा जैसे रोमांचक नज़ारे और अनुभव समेटता जैसलमेर एक अनोखी जगह है। जैसलमेर किले की गलियों में घूमना या गढ़ीसर झील के किनारे शांत माहौल में शाम बिताना, कुछ ऐसे अनुभव हैं जो आप ज़िंदगी में कभी नहीं भूलेंगे।

जैसलमेर में क्या करें


जैसलमेर किले में जाकर 12वीं शताब्दी की अलंकृत जैन मूर्तियों और पत्थर की नक्काशी की विरासत पर नज़र फेरे


बड़ा बाग में महाराजाओं की छत्रियों को परखें

डेज़र्ट कल्चरल सेंटर और म्यूज़ियम में राजास्थानी इतिहास और संसकृति से रूबरू हों

अगर आप और आपके पार्टनर को संसकृति के रंग में ढलना पसंद है तो हनीमून पर जैसलमेर जाएँ।

घूमने का सबसे अच्छा समय: नवंबर से मार्च


जैसलमेर कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर हवाई अड्डा है, जो जैसलमेर से लगभग 275 कि.मी. दूर है।

रेल मार्ग से: जैसलमेर दिल्ली, जयपुर, जोधपुर और अन्य प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लग्ज़री ट्रेन 'पैलेस ऑन व्हील्स' भी जैसलमेर जाती है।

सड़क मार्ग से: उत्तर भारत के सभी मुख्य शहर से जैसलमेर के लिए सीधी बसें मिल जाएँगी। डीलक्स के साथ-साथ साधारण, निजी या राज्य परिवहन बसों का लाभ प्रमुख शहरों जैसे बीकानेर, जयपुर, अहमदाबाद, माउंट आबू आदि से उठाया जा सकता है।


4. गोवा

गोवा भारतीय और पुर्तगाली संस्कृती, सूरज और समुद्र, बीच, अध्यात्मिकता और ट्रान्स पार्टियों का एक कॉकटेल है। इस राज्य की शुरुआत से लेकर अंत तक फैले बीच भारत के कुछ सबसे खूबसूरत तटों में से हैं। पार्टी प्लेस बागा से लेकर शांतिपूर्ण अराम्बोल तक, हलचल भरे अंजुना से लेकर सुस्ताते असगाँव तक, गोवा में हर तरह के हनीमून कपल के लिए कुछ न कुछ है।

गोवा में क्या करें

कोंकण तट के मस्तीभरे बीच का मज़ा लें

बीच पर बने कैफे और बार पर गोआ का स्वाद चखें

वारका, कांदोलिम, अराम्बोल, अंजुना, बागा, यहाँ ना तो बीचेज़ की लिस्ट खत्म होती है और ना ही मज़े!

बेहद सुंदर बीचेज़ पर खुले दिल से पार्टी के शौकीन कपल्स को हनीमून के लिए गोआ आना चाहिए।

गोवा जाने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से जनवरी।

गोवा कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग सेडाबोलिम हवाई अड्डा राज्य की राजधानी पंजिम से केवल 29 कि.मी. दूर है और चेन्नई, मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद, कोचीन और बैंगलोर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग से: गोवा में दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, एक मडगाँव में और दूसरा वास्को डी गामा में, जो देश भर की ट्रेनों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से: आप मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद और पुणे से रात भर में गोवा पहुँच सकते हैं। नियमित बस सेवाएँ भी हैं, जो इन शहरों से संचालित होती हैं।


5. अंडमान और निकोबार द्वीप

झिलमिलाता हुआ फ़िरोज़ा पानी, प्राचीन सफेद समुद्र तट, घने मैंग्रोव जंगल और सूनहरा सूर्यास्त अंडमान द्वीपों को भारत के सबसे रोमांटिक बीच-साइड डेस्टिनेशन में से एक बनाते हैं। यहाँ के चमकते बीच समुद्र में छिपे किसी मोती की तरह है, जिसकी खोज में आप यहाँ खिंचे चले आते हैं। यह उन हनीमूनर्स के लिए एक शानदार जगह है जो समुद्र तट से प्यार करते हैं लेकिन भीड़-भाड़ से नहीं। अं

अंडमान में क्या करें


कॉर्बिन के कोव समुद्र तट, उत्तरी खाड़ी द्वीप और रॉस द्वीप पर जाएँ

सेलुलर जेल में लाइट और साउंड शो का अनुभव करें

राधानगर बीच पर शानदार सूर्यास्त देखें और हैवलॉक द्वीप के एलिफेंट बीच पर स्नॉर्केलिंग का आनंद लें।

जो कपल हनीमून पर एक शांत और सुंदर, कम भीड़-भाड़ वाले बीच पर छुट्टियाँ मनाना चाहते हैं, अंडमान उनके लिए पर्फेक्ट है।

घूमने का सबसे अच्छा समय: दिसंबर से मार्च।

अंडमान कैसे पहुँचें

अंडमान पहुँचने का ज़रिया है पोर्ट ब्लेयर, जो हवाई और समुद्र मार्ग से जुड़ा बाकी जगहों से जुड़ा हुआ है। चेन्नई, कलकत्ता और विशाखापत्तनम से पोर्ट ब्लेयर के लिए जहाज़ भी उपलब्ध हैं। हालांकि, इन द्वीपों तक पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका नई दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई से उड़ान भरना है, क्योंकि यात्री जहाजों को लगभग 50-60 घंटे लगते हैं।


6. केरल

ताड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें, मसालों के बागान, बैकवॉटर्स में बोटिंग इन सब के साथ केरल एक अलग ही तटीय स्वर्ग के तौर पर पहचान बनाता है। गॉड्स ओन कंट्री, यानी भगवान का देश अपनी पल-पल बदलते नज़ारों, वन्यजीवों और अछूते समुद्र तटों से आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। यहाँ के शांत वातावरण में खुशबूदार खाने का स्वाद लेते हुए आसमान को रंग बदलते देखें, या नारियल पानी पीते हुए समुद्र तट पर मौज करें। आपको यहाँ वो माहौल मिलेगा जिसके लिए हम शहर वाले तरसते रह जाते हैं।

केरल में क्या करें?

मुन्नार की सुंदरता में खो जाएँ

कोवलम, वर्कला, कन्नूर जैसे समुद्र तटों पर आराम करें

सेंट फ्रांसिस चर्च जाएँ

रोज़ गार्डन में एक शानदार शाम बिताएँ

पेरियार झील और मट्टुपेट्टी झील पर जाएँ।

जो जोड़े प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना पसंद करते हैं उनके लिए केरल एक पर्फेक्ट हनीमून डेस्टीनेशन है।

घूमने का सबसे अच्छा समय: नवंबर से फरवरी

केरल कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के साथ, केरल पहुँचना बहुत आसान है। तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा केरल के दक्षिणी भाग में स्थित है, कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा केंद्र में स्थित है और उत्तर में कालीकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

रेल मार्ग से: 200 से अधिक रेलवे स्टेशनों के साथ, ट्रेन भी भगवान के अपने देश तक पहुँचने के लिए एक अच्छा विकल्प है। केरल के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर और कोलकाता से सीधी ट्रेनें मिल जाएँगी।

सड़क मार्ग से: आप राष्ट्रीय राजमार्ग 17, 47 और 49 पर देश के किसी भी हिस्से से केरल पहुँच सकते हैं।

7. पॉन्डिचेरी

भारत की फ्रांसीसी राजधानी, पॉन्डिचेरी भारत के पूर्वी तट बसा एक बेहद सुंदर शहर है। बोगनविलिया से घिरा शहर, पेस्टल रंगों में रंगे घर और पत्तों से लदे आँगन जहाँ शहर का भीतरी हिस्सा है वहीं चमकती रेत से घिरे समंदर पॉन्डिचेरी का पहरा देते हैं। पॉंडी को अपने नए और पुराने के संगम के लिए जाना जाता है और यहाँ के लोकल और इंटरनेशनल फ्लेवर को देख करआप इसे खुद अनुभव कर पाएँगे।

पॉन्डिचेरी में क्या करें?

पिचवरम मैंग्रोव फॉरेस्ट के बीच से गुज़रते हुए बोटिंग करें

अध्यात्मिक शांति के लिए ऑरोबिंदो आश्रम में कुछ वक्त बिताएँ

पॉन्डिचेरी की शांत बीचों पर शाम गुज़ारें

ऑरोविले जाएँ; ओस्टर झील का आनंद लें

घूमने का सबसे अच्छा समय: नवंबर से फरवरी

पॉन्डिचेरी कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: पॉन्डिचेरी का घरेलू हवाई अड्डा बेंगलुरु से जुड़ा हुआ है, जहाँ से बुधवार के अलावा हर दिन उड़ान भरी जा सकती है। इसके अलावा आप नज़दीकी चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर सकते हैं जो पांडिचेरी से लगभग 135 कि.मी. दूर है।

रेल मार्ग से: पॉन्डिचेरी से निकटतम रेलवे स्टेशन विल्लुपुरम है, जो शहर से 35 कि.मी. दूर है। विल्लुपुरम रेलमार्ग नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और त्रिवेंद्रम जैसे शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से: पॉन्डिचेरी पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका सड़क के ज़रिए ही है। पॉन्डिच्चेरी से चेन्नई और बैंगलोर के बीच रोज़ाना बसें चलती हैं। आप चाहे तो टैक्सी भी कर सकते हैं।

8. कुन्नूर

नीलगिरि चाय के लिए मशहूर कुन्नूर, चाय बागानों, ट्रेक के रास्तों और लाल-टाइल की छतों से आबाद एक छोटा पहाड़ी शहर है। कुन्नूर की यात्रा के बारे में सबसे आकर्षक हिस्सा यहाँ चलने वाली हेरिटेज ट्रेन है जो आपको कोयंबटूर से कुन्नूर ले जाती है। यहाँ आए तो चाय के बागानों में चाय की छटाई से लेकर पेकेजिंग की पूरे सफर को देखना बिल्कुल ना भूलें। यहाँ मौजूद ट्रेकिंग रास्तों पर चलकर आपको शहर का ऐसा नज़ारा देखने को मिलता है जिसे आप शायद ही कभी भूला पाएँ।

कुन्नूर में क्या करें

डॉलफिन नोज़ व्यू प्वाइंट से सनसेट देखें

सेंट जॉर्ज चर्च पर कुछ वक्त बिताएँ

कैथरीन फॉल्स पर ताज़गी में भीगें

लैब रॉक पर पिकनिक मनाएँ

प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह पर्फेक्ट है।

घूमने का सबसे अच्छा समय: दिसंबर से मार्च

कुन्नूर कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: 70 कि.मी. की दूरी पर, कोयंबटूर यहाँ से निकटतम हवाई अड्डा है। कुन्नूर पहुँचने के लिए आप कोयंबटूर या बैंगलोर तक उड़ान भर सकते हैं।

रेल मार्ग से: ऊटी और मेट्टुपालयम के बीच चलने वाली नीलगिरि पर्वत रेलवे पर कुन्नूर एक मात्र स्टॉप है।

सड़क मार्ग से: राष्ट्रीय राजमार्ग 67 कुन्नूर को ऊटी और अन्य भारतीय शहरों से जोड़ता है। कोयंबटूर, ऊटी और कोटागिरी से कुन्नूर के लिए बसें रोज़ उपलब्ध हैं।

9. शिलॉंग

हरी घाटियाँ, नीले आसमान, दूध से सफेद झरने और एक संस्कृति जो यहाँ के परिदृश्य की तरह रंगीन है। यहाँ की हर गली में एक कहानी है और हर नुक्कड़ पर एक रहस्य सामने आने का इंतजार है। शिलॉंग खुली बाहों और नर्म मुस्कुराहट के साथ आपका स्वागत करता है और आपको प्राकृतिक सुंदरता के नज़ारों का तोहफा देता है।

शिलाॉंग में क्या करें

देश का सबसे ऊँचे वॉटरफॉल, नोहकालिकाई वॉटरफॉल को अनुभव करें

डॉन बॉस्को सेंटर में की स्थानीय कलाकृतियों को देखें

भारत की विविध संसकृति में खो जाने वाले जोड़ो को हनीमून पर शिलॉंग जाना चाहिए

घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च

शिलॉंग कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा उमरोई में है, जो शिलाॉंग से लगभग 35 कि.मी. दूर है। यह एक बहुत छोटा हवाई अड्डा है, इसलिए बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ नहीं है। यहाँ से होटल पहुँचने के लिए आपको प्राइवेट टैक्सी ही करनी होगी।

रेल मार्ग से: निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी में है, जो शिलॉंग से 104 कि.मी. दूर है। ये स्टेशन भारत के सभी प्रमुख शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप शिलॉंग तक जाने के लिए आसानी से सार्वजनिक बसें या निजी टैक्सियाँ ले सकते हैं।

सड़क मार्ग से: राष्ट्रीय राजमार्ग 40 शिलॉंग को गुवाहाटी से जोड़ता है। यह एक ऑल वेदर रोड है इसलिए आप इस पर भारी बारिश के बावजूद ड्राइव कर सकते हैं। राज्य परिवहन की बसें भी उसी मार्ग पर आसानी से मिल जाती हैं।

10. तवांग

पहाड़ों के बीच, मठों से घिरा और दिवारों पर बनी रंगीन चित्रों से भरा हुआ तवांग एक अलग ही शहर है, जहाँ आकर ऐसा लगता है जैसे आप दूनिया के किसी दूसरे छोर पर आ गए हैं। झिलमिलाते झरनों और हरे-भरे जंगलों के बीच अतुलनीय सुंदरता पेश करता तवांग फरवरी में और भी खूबसूरत दिखता है जब यहाँ तिब्बती नव वर्ष मनाया जाता है।

तवांग में क्या करें

माधुरी झील (शोंगा-तसर झील के नाम से भी जानी जाती है) तवांग के सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक है।

नूरनांग झरने पर बिताएँ एक दिन

घूमने का सबसे अच्छा समय: मार्च से सितंबर

तवांग कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा गुवाहाटी में है, जो तवांग से 480 कि.मी. दूर है। यह एक घरेलू हवाई अड्डा है। यहाँ से तवांग में अपने होटल तक जाने के लिए आपको निजी टैक्सी या सार्वजनिक बसें मिल जाएँगी।

रेल मार्ग से: निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है, जो तवांग से 485 कि.मी. दूर है। यह स्टेशन भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। भालुकपोंग तक पहुंचने के लिए कोई टैक्सी या बस ले सकता है और वहाँ से तवांग पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग से: बोमडिला से तवांग तक के लिए अरुणाचल प्रदेश राज्य परिवहन की नियमित बसें हैं जो आप ले सकते हैं। बोमडिला तक सवारी में 11 घंटे लगते हैं, और आप अगली सुबह तवांग के लिए रवाना हो सकते हैं।

तो चलिए इस वक्त का सही इस्तेमाल करिए, अपने पार्टनर को साथ लीजिए और प्लानिंग करना शुरू कीजिए!




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