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Friday, 10 July 2020

भारत का वो मंदिर, जहां मरने के बाद सबसे पहले पहुंचती है आत्मा

भारत का वो मंदिर, जहां मरने के बाद सबसे पहले पहुंचती है आत्मा
 
एक मंदिर ऐसा है जहां मरने के बाद हर किसी को जाना ही पड़ता है चाहे वह आस्तिक हो या नास्तिक। यह मंदिर किसी और दुनिया में नहीं बल्कि भारत की जमीन पर स्थित है। देश की राजधानी दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान में स्थित इस मंदिर के बारे में कुछ बड़ी अनोखी मान्यताएं प्रचलित हैं।

यहां पर एक ऐसा मंदिर है जो घर की तरह दिखाई देता है। इस मंदिर के पास पहुंच कर भी बहुत से लोग मंदिर में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। बहुत से लोग मंदिर को बाहर से प्रणाम करके चले आते हैं। इसका कारण यह है कि, इस मंदिर में धर्मराज यानी यमराज रहते हैं। संसार में यह इकलौता मंदिर है जो धर्मराज को समर्पित है। 

इस मंदिर में एक खाली कमरा है जिसे चित्रगुप्त का कमरा माना जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं। मान्यता है कि जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं। चित्रगुप्त जीवात्मा को उनके कर्मो का पूरा ब्योरा देते हैं इसके बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है। 
कहा जाता है कि यहां पर यमराज कर्मों के अनुसार आत्मा को अपना फैसला सुनाते हैं। 
यह भी मान्यता है इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे के बने हैं। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं। गरूड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में चार दिशाओं में चार द्वार का उल्लेख किया गया है।




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Thursday, 9 July 2020

ये हैं भारत के बेस्ट बाइकिंग रूट, जो आपको अगले एडवेंचर में पहाड़ों को एक्सप्लोर करने मे मदद करेंगे !

ये हैं भारत के बेस्ट बाइकिंग रूट,  जो आपको अगले एडवेंचर में पहाड़ों को एक्सप्लोर करने मे मदद करेंगे !

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि दुनिया के बेहद ऊँचे पहाड़ों का घर, हिमालय हमेशा से ही रोमांच के दीवानों को अपनी ओर खींचता रहा है। फिर चाहे बीर में पैराग्लाइडिंग हो, ऋषिकेश में राफ्टिंग हो या कुफरी में स्कीइंग, पहाड़ों के सबसे फ़ेमस पर्यटन स्थलों में भी हमेशा एडवेंचर की अपनी कुछ खास ही जगह होती है। हालांकि एक ऐसी चीज़ भी है जिससे पहाड़ों में बिताई जाने वाली छुट्टियों में एक शानदार मोड़ आ जाता है, और कोई भी एडवेंचर एक्टिविटी उसका मुक़ाबला नहीं कर सकती, वो है – अपनी जर्नी को फील करते हुए पहाड़ों में बाइक दौड़ाना।

अपनी बाइक से पथरीली सड़कों और संकरे दर्रो को पार करने का रोमांच ही कुछ और है, यह जानते हुए भी की कुछ भरोसा नहीं है की अगले मोड़ पर आपको क्या मिल जाए और सच बताऊँ तो यही वो चीज़ है जिसके लिए हर बाइकर सपने देखता है । अगर आप एक बाइकर हैं और आप अपनी बाइक को राइड पर ले जाने से नहीं रोक पा रहे हैं  तो यहाँ भारत के बेस्ट बाइकिंग रास्तों की लिस्ट दी गई है, जो आपको अगले एडवेंचर में पहाड़ों को एक्सप्लोर करने मे मदद करेंगे:


1. श्रीनगर से मनाली
लेह से होकर गुज़रने वाली श्रीनगर से मनाली की रोड-ट्रिप, भारत के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण रास्तों से गुज़रती है और इसीलिए यह रोड-ट्रिप हर बाइकर की बकेट लिस्ट में होती ही होती है । 10 दिनों से ज्यादा चलने वाली इस रोड-ट्रिप में वो सब कुछ है जो एक ट्रैवलर और बाइकर को चाहिए होता है - शानदार डेस्टिनेशन, ग्लैमरस व्यू , शांति और सबसे महत्वपूर्ण, एक रोमांचकारी यात्रा।
 अगर आप एक बाइकर हैं, जो अपनी लिमिट्स को देखना चाहते हैं, तो सब कुछ छोड़ दें और तुरंत श्री नगर से मनाली रोड ट्रिप के लिए निकल जाए, 



दिन: 11 दिन / 10 रातें


जाने का सबसे अच्छा समय: लेह तक रोड से सिर्फ मई और सितंबर के महीनों के बीच ही पहुँचा जा सकता है। हालांकि, पर्यटकों की भीड़ से बचने के लिए, मई के अंत या जून की शुरुआत में ट्रिप की प्लानिंग कर सकते है, जब सड़कें खोली ही जाती हैं और ज्यादा पर्यटकों का आना शुरू नहीं होता है।


बेस्ट एक्सपीरियंस: लेह के मठों में आध्यात्मिक अनुभव लें, कश्मीरी ग्रेट लेक ट्रेक को देखें, द्रास वॉर मेमोरियल को देखने से देशभक्ति की भावना पैदा होगी; पैंगोंग झील में वॉटर स्पोर्ट्स का मज़ा उठाएँ  और ओल्ड मनाली में बैकपैकर लाइफ को एक्सपीरीयंस करें।


बेस्ट रूट - श्रीनगर - सोनमर्ग - कारगिल - लेह - नुब्रा - तुर्तुक - नुब्रा - पंगोंग - हैले - त्सोकर - केलोंग - मनाली - दिल्ली



2. स्पीति घाटी
ये एक ऐसी रोड-ट्रिप है जिसमें पूरी जर्नी ही एक डेस्टिनेशन बन जाती है, प्राचीन स्पीति वैली में बाइक चलाने का अनुभव बाकी रोड-ट्रिप्स से बहुत अलग है । स्पीति घाटी की बाइकिंग आपको हमेशा के लिए बदल देगी और आप पर अपनी छाप छोड़ देगी  उन पिक्चर परफेक्ट गाँवो को एक्सप्लोर करना, सँकरे पहाड़ी रास्तों को पार करना और बीच में कहीं भी बाहर कैंप लगाना, ऐसी बहुत सी चीज़ेंं हैं जिनकी फील आपके यहाँ से जाने के बाद भी लंबे समय तक आपके साथ रहती हैं। अपने आप को एक बहुत ज़रूरी ब्रेक दें, अपने आप को गियर-अप करे और मुझ पर यकीन कर इस ट्रिप के लिए निकल जाएँ क्योंकि यह ट्रिप घूमने से ज्यादा खुद को जानने के लिए पर्फेक्ट है !
दिन: 9 दिन / 8 रातें


जाने का सबसे अच्छा समय: मई से अक्टूबर के बीच गर्मियाँ होती है, जिसमें 0 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान होता है, यह स्पीति घूमने का सबसे अच्छा समय होता है।

 बेस्ट एक्सपीरियंस: गियू गँव में एक ममी को देखे, खतरनाक बारलाचा पास को क्रॉस करते समय रोमांच की हदें पार करें, काज़ा के मुख्य बाज़ार में खोपड़ियों की दुकान देखें; याक की सफारी करें और स्पीति और पिन नदियों में व्हाइट वॉटर राफ्टिंग का मज़ा उठाएँ।

बेस्ट रूट - चंडीगढ़ - नारकंडा - सांगला - कल्पा - काज़ा - कुंजुम ला - चंद्रताल - मनाली - दिल्ली



3. मनाली से पैंगोंग लैक
अगर आपको लगता है कि आपके लेह के ट्रिप के दौरान आपको भीड़भाड़ वाले टुरिस्ट स्पॉट ही मिलेंगे, तो मनाली से पैंगोंग की एक बाइकराइड आपकी इस सोच को हमेशा के लिए बदल देगी। पहाड़ी रेगिस्तान, झीलें, बंजर पहाड़ियाँ और दुनिया की सबसे ऊँची मोटरेबल रोड से गुज़रते हुए ये रोड आपको इस क्षेत्र के कुछ सबसे अच्छे व अनछूई जगहों पर ले जाती है। चाहे आप खुद को बेहतर जानने के मूड में हो या ऐसे कोई व्यक्ति हों जो किसी शानदार और ग्रैंड बाइक ट्रिप पर जाना चाहता हैं तो आपको मनाली से पैंगोंग के बीच एक राइड ज़रूर करके आनी चाहिए ।

दिन: 11 दिन / 10 रातें


जाने का सबसे अच्छा समय: इस ट्रिप पर जाने का सबसे अच्छा समय गर्मियों की शुरुआत के दौरान होता है, जो कि मई और जून के बीच होता है क्योंकि उस दौरान यहाँ रोड सबसे अच्छी स्थिति में होती हैं।

बेस्ट एक्सपीरियंस: वशिष्ठ के गर्म पानी के झरनों में डुबकी लगाएँ; सदियों पुराने लेह पैलेस को एक्सप्लोर करें जो ऊँचे पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है, त्साराप नदी के किनारे एक रात का समय बिताएँ और गुरुद्वारा पठार साहिब में प्रार्थना करना यहाँ पर आपका बेस्ट अनुभव रहेगा ।

बेस्ट रूट - मनाली - जिस्पा - सरचू - लेह - खारदुंगला - पैंगोंग झील - लेह - सरचू - मनाली



4. चंडीगढ़ से लेह
प्रेम और मनोरम भोजन की भूमि से लेकर दुनिया की छत तक, चंडीगढ़ से लेह तक की इस रोमांचक रोड-ट्रिप में आपको अपनी आँखो के सामने ही कल्चर बहुत तेज़ी से बदलता हुआ दिखेगा। यह एक ऐसी रोड-ट्रिप है जिसमें आप अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं को ना सिर्फ देखोगे बल्कि उसे जियोगे भी । निश्चित तौर पर इस ट्रिप मेंआप पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बेस्ट वर्ज़न को देख पाओगे।

दिन: 12 दिन / 11 रातें

जाने का सबसे अच्छा समय: चंडीगढ़ और लेह को जोड़ने वाली रोड केवल मई और अक्टूबर के बीच खुले रहते हैं, जिससे यह यात्रा करने का एकमात्र संभव समय बन जाता है।

बेस्ट एक्सपीरियंस: चंडीगढ़ के सबसे आइकॉनिक रेस्टौरंट, पाल ढाबा में खाना खाएँ; शांत थिकसे मठ में ध्यान करें; नुब्रा वैली से रात में साफ आसमान को देखें; मूनलैंड से लेह के यूनिक व्यू को देखें और प्रसिद्ध हिडिम्बा देवी मंदिर भी जाएँ ।

बेस्ट रूट - चंडीगढ़ - उधमपुर - श्रीनगर - सोनमर्ग - द्रास - कारगिल - लामायुरू - लेह - नुब्रा घाटी - पैंगोंग त्सो - सरचू - मनाली


5. काठगोदाम से मुनस्यारी
उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी से शुरू होकर, काठगोदाम से मुनसियारी तक के इस रोड पर बाइकर्स फेमस पर्यटन स्थलों के साथ-साथ दूरदराज के पर्वतीय कस्बों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। हालांकि राइडिंग के लिए, ट्रिप के पहले हाफ में सड़कें ज्यादा अच्छी है, नैनीताल के बाद ये रास्ता काफी दुर्गम हो जाता है, जिसमें अनुभवी बाइकर्स को भी राइड करने में थोड़ी परेशानी तो आती ही है। हालांकि मुनस्यारी तक जाने या दिखने वाली बर्फ से ढकी चोटियाँ आपको लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए मोटिवेट करती रहती है ।


दिन: 7 दिन / 6 रातें

जाने का सबसे अच्छा समय: इस यात्रा को करने का सबसे अच्छा समय गर्मियों (मार्च से जुलाई) में है क्योंकि इसके अलावा तो इस क्षेत्र में भारी बारिश और बर्फबारी होती है जो कि यहाँ पर राइड करना लगभग असंभव बना देती है ।

बेस्ट एक्सपीरियंस: कुमाऊँनी दुकान पर ओर्गनिक प्रॉडक्ट और घर के बने चॉकलेट खरीदना; प्रसिद्ध काँची धाम आश्रम में एक रात बिताना; उत्तराखंड की पहाड़ियों में एडवैंचर एक्टिविटीज़ करना , बिनसर वन्यजीव अभयारण्य में ट्रेक करें और प्राचीन नंदा देवी मंदिर जाएँ।

 बेस्ट रूट - काठगोदाम - नैनीताल - मुक्तेश्वर - रानीखेत - कौसानी - बिनसर - बागेश्वर - मुनस्यारी


6. गुवाहाटी से तवांग
गुवाहाटी से शुरू होने होकर, जिसे 'पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार' भी कहा जाता है, तवांग से जुड़ने वाला यह रोड देश के इस हिस्से में अपने अंदर के एडवेंचरस व्यक्ति को बाहर निकालने का सबसे शानदार तरीका है। ग्रीन नेशनल पार्क, बर्फ से जमी हुई झीलों के पास से गुज़रने वाली इस रोड पर सिर्फ एक रोड-ट्रिप के बाद ही आप अपने आपको बौद्ध संस्कृति के थोड़ा और करीब पाएँगे। अगर आप वो व्यक्ति हैं जो ऑफबीट और अनछूए रास्तों को लेना पसंद करता है और आपके अंदर के एक्सप्लोरर को आराम नहीं देना चाहते है , तो तुरंत गुवाहाटी और तवांग के बीच का रोड ट्रिप प्लान करें।

 दिन: 7 दिन / 6 रातें

जाने का सबसे अच्छा समय: मार्च से जून तक गर्मियाँ रहती है। उस समय यहाँ का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो राइड के लिए इस समय को पर्फेक्ट बनाता है।


बेस्ट एक्सपीरियंस: पोबितोरा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में एक सींग वाले गैंडों को स्पॉट करें; महाभैरव मंदिर देखें; भालुकपोंग किले के खंडहरों को एक्सप्लोर करें और तवांग युद्ध स्मारक का दौरा करें।

बेस्ट रूट - गुवाहाटी - तेजपुर - भालुकपोंग - बोमडिला - दरंग - तवांग


7. ऋषिकेश से बद्रीनाथ
देश में सबसे अधिक बाइकिंग टैक्स लगाने वाले रोड्स में से एक, ऋषिकेश और बद्रीनाथ के बीच का ये स्ट्रेच हर एक मोड़ पर राइडर को चुनौती देता है। रोमांचक, संकरी और घुमावदार रास्तों से भरी ये रोड भारत के सबसे खतरनाक हिस्सों में से एक है, और इसी वजह से ये दुनिया भर से आने वाले राइडर्स को आकर्षित करती है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक की राइड इस गर्मी में आपकी टु डू लिस्ट में होनी ही चाहिए।

दिन: 10 दिन / 9 रातें


जाने का सबसे अच्छा समय: बद्रीनाथ की यात्रा का सबसे अच्छा समय गर्मी में है, मई से जून तक और फिर सितंबर से अक्टूबर के बीच सर्दियाँ शुरू होने से पहले।

बेस्ट एक्सपीरियंस: प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब जाएँ; चोपता गाँव के जीवन के बारे में जानें; वैली ऑफ फ्लॉवर्स में घूमें और चीन से पहले भारत के लास्ट गाँव माणा का दौरा करें।

बेस्ट रूट - ऋषिकेश - रुद्रप्रयाग - चमोली गोपेश्वर - जोशी मठ - गोविंद घाट - बद्रीनाथ – माणा


8. सिलीगुड़ी से गुरुडोंगमार झील
सिलीगुड़ी को चीन की सीमा से पहले उत्तरी सिक्किम के लास्ट पॉइंट से जोड़ने वाली, गुरुडोंगमार झील, वास्तव में भारत की सबसे डरावनी बाइक राइडस में से एक है। भले ही ये राइड जायदा लंबी ना हो, लेकिन ये सच बात है की यहाँ की सड़कें बेहद विश्वासघाती हैं, और यही इस राइड को ज्यादा खतरनाक बनाता है । और साथ ही साथ इस हाइवे पर आपको कम आबादी वाले गाँवों और घाटियों के बीच से जाना होता है जिससे आपकी इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास का अच्छा-खासा टेस्ट हो जाता है ।


 दिन: 10 दिन / 9 रातें

जाने का सबसे अच्छा समय: मार्च से जुलाई के बीच का टाइम काफी सही है।

बेस्ट एक्सपीरियंस: टी इस्टेट मे चाय बनने के प्रोसैस को जाने ; एरिया के स्ट्रीट फूड के साथ राइड का मज़ा ले ; तीस्ता रिवर में व्हाइट वॉटर राफ्टिंग और माउंट सिओनोलचू और खानचेनजोंग के सुंदर व्यू को देखें

बेस्ट रूट - सिलीगुड़ी - कुरसेओंग - दार्जिलिंग - कलिम्पोंग - गंगटोक - चुंगथांग - लाचेन - थांगु घाटी - गुरुडोंगमार झील



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Tuesday, 7 July 2020

4200 मीटर की ऊंचाई से दिखाई देती है छिपला_केदार की अद्भुत खूबसूरती

4200 मीटर की ऊंचाई से दिखाई देती है  छिपला_केदार की अद्भुत खूबसूरती
 छिपला केदार, जो कि पिथौरागढ़ जिले में है।  पिथौरागढ़ समुद्र तल से 1,645 मीटर की ऊंचाई पर है और उत्तराखंड का क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से तीसरा सबसे बड़ा जनपद है।
इस जिले में नंदा देवी, त्रिशूल, राजरंभा, पंचाचूली व नंदाखाट आदि हिमालयी चोटियां, मिलम, रालम व नामिक ग्लेशियर तथा विशाल गोल्फ कोर्स, खूबसूरत पहाड़ व घास के मैदान-बुग्याल पिथौरागढ़ की खूबसूरती को बढ़ाते हैं। इसके अलावा पिथौरागढ़ के इर्द-गिर्द चार कोटें यानी किले मौजूद हैं, जिन्हें भाटकोट, डूंगरकोट, उदयकोट तथा ऊंचाकोट के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि कभी यहां सात सरोवर स्थित थे, जिनके सूखने से अब यह क्षेत्र पहाड़ी घाटी के रूप में बदल गया है।

छिपला केदार के बारे में
समुद्र तल से लगभग 4200 मीटर की ऊंचाई पर बरम कस्बे से लगभग 50-55 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई के बाद छिपला कोट में यह बुग्याल क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ देवी-देवताओं का निवास स्थान भी माना जाता है। जिस वजह से भगवान केदार के नाम से इसे छिपला केदार नाम से भी जाना जाता है। माता मैणामाई और पिता कोडिया नाग से जन्म लेने वाले केदार देवता दस भाई-बहन थे। तीन भाइयों में केदार सबसे छोटे थे। उदैण और मुदैण भाई और होकरा देवी, भराड़ी देवी, कोडिगाड़ी देवी, चानुला देवी, नंदा देवी, कालिका देवी, कोकिला देवी बहनें थी। बहनों में कोकिला देवी सबसे छोटी थी। कोकिला देवी, छिपला कोट के हृदय में स्थित गांव कनार में विराजमान हैं। छिपला जात यात्रा कोकिला कनार मंदिर से शुरू होती है।
दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित गारापानी से आगे बढ़ने पर दो खूबसूरत झील सिन्स्यामिन्सया नजर आती हैं। इस सरोवर में जनजातीय लोग सामूहिक पूजा करते हैं, जिसे जात कहा जाता है।आगे बुग्यालों में सालम पंजा, कुटकी, मीठा, कीडा-जड़ी, डोलू, टाटरी जैसी विभिन्न जड़ी-बूटियां यहां मौजूद हैं। इन्हीं बुग्यालों से शुरू होता है आकर्षक ब्रह्मकमल का मैदान। खम्पाधार जिसे जारचौर भी कहते हैं एक महत्वपूर्ण पूजा स्थल है। जहां पूजा अर्चना कर ब्रह्मकमल अर्पित किया जाता है। यहां से आगे का मार्ग काफी कठिन है। इस तीखीधार से धीरे-धीरे नीचे उतरने के बाद सामने के टीले पर चढ़ते ही पर्यटक अपने को झीलों से घिरा पाते हैं।
छिपला केदार पर की जाने वाली पूजा
छिपला केदार जाने के लिए सबसे पहले सेराघाट से जाना पड़ता है, जिनका ब्रतपन या जनेऊ होना होता है, उन्हें घर से ही नगे पांव पैदल जाना होता है। अन्य श्रद्धालु चप्पल पहन कर जा सकते हैं, बिना ब्रतपन वालों को छिपाला केदार जाने की अनुमति नहीं होती है। जनेऊ वाले घर से सफ़ेद कपडे पहनकर गले मे घंटी लगाकर, भकोर बजाते हुवे छिपला केदार की तरफ रास्ते भर शंख बजाते हुए जाते हैं। रास्ते में देवी देवता भी अवतरित होते रहते हैं। इस मंदिर में कोई बाहरी सामान नहीं ले जा सकते हैं। इसके अलावा चमड़े का सामान ले जाना भी मना होता है, फिर चाहे वह पर्स या बेल्ट ही क्यों न हो। फल को छोडकर ​अन्य किसी भी तरह की खाद्य सामग्री को भी मंदिर में लाना मना है।

यहां कैसे पहुंचें – 

दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 543 किलोमीटर है और नैनीताल से 260 किलोमीटर है। दिल्ली से मुनस्यारी की यात्रा रेल, बस या टैक्सी के माध्यम से की जा सकती है। यहां से छिपला केदार ट्रेक की शुरूआत की जाती है।



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आप भी अगर प्रदूषण या अपनी रोज़ाना की भाग-दौड़ से ऊब चुके हैं तो ताज़ी हवा के लिए आप जयपुर के ट्री हाउस रिजॉर्ट का रुख कर सकते हैं।

आप भी अगर प्रदूषण या अपनी रोज़ाना की भाग-दौड़ से ऊब चुके हैं तो ताज़ी हवा के लिए आप जयपुर के ट्री हाउस रिजॉर्ट का रुख कर सकते हैं।

धूल और बढ़ते प्रदूषण के कारण पिछले कई महीनों से देश की राजधानी दिल्ली में लोग साफ नीला आसमान देखने को तरस गए हैं। फ्रेश आवोहवा सबके के लिए बेहद ज़रूरी हो गई है। ऐसे में शहर से निकलकर तरोताजा होने को लेकर क्विक टिप्स के तौर पर मैं एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहा हूँ जो वाकई सुकून देने वाली हो सकता है। दिल्ली से मात्र 5 घंटे की दूरी पर स्थित एक रिजॉर्ट है जहाँ मेहमानों के लिए तमाम तरह की सुविधाएँ मौजूद हैं। इस शानदार जगह पर मिनी वाटरफॉल, प्राकृतिक हरे-भरे मैदान के अलावा खूबसूरत दृश्यों वाले पानी से भरे कॉटेज भी हैं। आप भी अगर प्रदूषण या अपनी रोज़ाना की भाग-दौड़ से ऊब चुके हैं तो ताज़ी हवा के लिए आप जयपुर के ट्री हाउस रिजॉर्ट का रुख कर सकते हैं।


जयपुर ट्री हाउस रिजॉर्ट 
क्यों जाएँ यहाँ?
ये ट्री हाउस रिज़ॉर्ट स्यारी घाटी के नेचर फार्म में स्थित है। यहाँ से आकर्षक अरावली और लकड़ी से बनी कई सारी इमारतों का दृश्य मेडिटेशन, पढ़ने और आराम फरमाने के लिए एक बढ़िया जगह मानी जाती है। यहाँ स्विमिंग पूल, जंगल सफारी, गोल्फ कोर्स, एवियरी स्पा, क्वाड बाइक, प्राकृतिक पार्क के साथ ही वाईफाई सुविधाओं से परिपूर्ण माहौल मिलता है जो कि पूरे परिवार के लिए परफेक्ट है। अपने परिवार या दोस्तों के साथ अगर आप किसी शांतिपूर्ण वीकेंड की तलाश कर रहे हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट है।

क्या कुछ है ख़ास

ये ट्री हाउस रिजॉर्ट अवार्ड विनिंग जगह है जो कि बेहतरीन और जिम्मेदारीपूर्ण हॉस्पिटालिटी के लिए मशहूर है। प्रकृति की गोद में इसके आरामदायक और किफायती कमरे आराम करने के लिए हर सुविधा से लैस हैं। ये संपूर्ण जगह जीवन के तीन तत्वों यानी जल, वायु और पृथ्वी से प्रेरित है। इन तत्वों के आधार पर मेहमान कमरों का चयन कर सकते हैं।


यहाँ के कमरे
यहाँ तीन तरह के कमरे उपलब्ध हैं जैसे ट्री हाउस नेस्ट्स, ओवर-वॉटर कॉटेज और अर्थ हाउस एबोड्स आदि। हवा के तत्वों से भरपूर ट्री हाउस नेस्ट्स बहुत ही आरामदायक है। कीकर पेड़ों के नीचे स्थित ये ट्री हाउस मेहमानों के ट्रीहाउस में रहने का सपना पूरा करता है। यहाँ आप अनगिनत पक्षियों के चहचहाने, प्राकृतिक हरियाली और ताज़ी हवा का आनंद ले सकते हैं।


अगर आप पानी वाली जगह पर अपनी छुट्टी बिताना चाहते हैं तो फिर आपके लिए नौ ओवर-वॉटर कॉटेज हैं। यहाँ के कैस्केडिंग झरने, जकूजी, आउटडोर शॉवर, आंगन के साथ कांच के फर्श वाला सेक्शन आपको ऐसा महसूस कराएगा जैसे आप पानी पर चल रहे हैं।
कमरों के लिए तीसरा विकल्प अर्थ हाउस एबोड्स है। देश में मिट्टी के घरों की बढ़ती प्रवृत्ति के आधार पर बने यह कमरे ग्रामीण जीवन की भावना को उजागर करते हैं। कमरों में तो मिट्टी की फिनिशिंग है जबकि इसके बाहरी हिस्से गाँव की कलाकृतियों से सजे हैं।


रिज़ॉर्ट और उसके आसपास क्या करें?
यहाँ आपके लिए लंबी सूची है। मनोरंजन के लिए अलग कमरा है, वहीं बच्चों के लिए एक बैडमिंटन, वॉलीबॉल कोर्ट और दूसरे गेम्स की भी व्यवस्था है। इसके अलावा बाहरी गतिविधियों जैसे नेचर जिम, जंगल सफारी के साथ ही बर्ड वॉचिंग का भी आप चयन कर सकते हैं।

अगर आप बाहर घूमना ही चाहते हैं तो जयपुर में ऐसी बहुत सारी जगहें हैं जैसे-



चौकी घानि
यहाँ आप जी-भर कर खाएँ:


आमेर किला
राजसी दृश्यों का आनंद लें:


सिटी पैलेस
उस महल का दीदार करें जो एयरबीएनबी में तब्दील हो चुका है:
 

हवा महल
जयपुर के आसमान को यहाँ से निहारें:



यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय

जयपुर में गर्मी के मौसम में बहुत ज्यादा गर्मी होती है। इसलिए इस रिज़ॉर्ट में जाने का सबसे बढ़िया समय सितंबर से मार्च तक का होता है। आप अगर प्रकृति प्रेमी हैं तो यह स्थान आपकी लिस्ट में ज़रूर होना चाहिए। अपने शहर की हलचल से दूर सुकून भरे वातावरण में आराम फरमाने के लिए आज ही इस रिजॉर्ट में अपना कमरा बुक करें।


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अगर आप भी कोरोना वायरस संकट के बीच घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप इन 5 जगहों पर जा सकते हैं !

अगर आप भी कोरोना वायरस संकट के बीच घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप इन 5 जगहों पर जा सकते हैं !


दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने हाल ही में ट्वीट कर सभी स्मारकों को खोलने की सलाह दी है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही लंबे समय घरों में बंद रहने के बाद लोगों को देश के विभिन्न समरकों में सैर करने का भी मौका मिलेगा। अगर आप भी कोरोना वायरस संकट के बीच घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप इन 5 जगहों पर जा सकते हैं


1. लाल किला, नई दिल्ली

इस किले को 1648 में शाहजहां ने बनवाया था। यह बलुआ पत्थर से बना है और यह दो किलोमीटर तक फैला हुआ है। वर्तमान में इसमें दो मुख्य द्वार लाहोरी और दिल्ली गेट है। इस किले के अंदर मीना बाजार भी है।


2. स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

यह मंदिर पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है। इसे हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा भी कहा जाता है। यह सिख धर्म के पवित्र स्थलों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण स्वर्ण अर्थात सोने से किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में रोजाना 50 हजार श्रद्धालुओं को प्रसादम ( भोजन ) दिया जाता है।

3. मैसूर पैलेस

इस पैलेस का निर्माण 14 वीं शताब्दी में हुई है। इसके बाद 1897 में इसका पुनः निर्माण किया गया था। यह पैलेस भारत-सर्सेनिक वास्तुकला के अंतर्गत बनी है। जबकि पैलेस तीन मंजिला है। इसकी ऊंचाई तकरीबन 145 फुट है और पैलेस में खूबसूरत उद्यान भी है। प्रमुख उतस्वों के दिन सोने का सिंहासन भी दिखाई देता है।


4. अजंता और एलोरा गुफाएं

इस वास्तुकला का निर्माण 5 वीं और 10 वीं शताब्दी के बीच हुई है। इन गुफाओं बुद्ध, जैन और हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की पत्थर से बनी प्रतिमा है। इसमें 12 बुद्ध, 17 हिन्दू और 5 जैन गुफाएं हैं। इसकी गिनती विश्व पुरातन धरोहरों में होती है।


5. आमेर का किला, जयपुर

आमेर का किला आमेर शहर में स्थित है जो कि जयपुर से 11 किलोमीटर दूर है। इसे मीणा समाज द्वारा 1592 में बनाया गया था। यह किला भी बलुआ पत्थर से बना है। इसमें कई तरह के आधुनिक वास्तुकला दिखती है, जिनमें शीश महल, दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास प्रमुख है। इसके अलावा इस किला में सुख निवास है।





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